25 करोड़ की जलापूर्ति योजना 4 साल में हुई फेल! दो साल से पानी को तरस रहे नगरवासी, विधायक प्रतिनिधि ने की जांच की मांग
सरायकेला:नगर परिषद क्षेत्र के हज़ारों लोग बीते दो वर्षों से पीने के पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। पेयजल संकट अब इतना गंभीर हो गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री सह विधायक चंपई सोरेन के प्रतिनिधि सनद आचार्य को खुद आगे आकर मोर्चा संभालना पड़ा।


उन्होंने संबंधित विभाग को कई बार पत्राचार कर पेयजल संकट के समाधान की मांग की, लेकिन समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने 22 जुलाई से आमरण अनशन की घोषणा कर दी थी। इसके लिए उन्होंने उपायुक्त से लिखित अनुमति भी मांगी थी।
अनशन की सूचना मिलने के बाद उपायुक्त ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए दो दिन का समय मांगा और आश्वासन दिया कि नगर क्षेत्र में जलापूर्ति की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
डीसी से मुलाकात के बाद विधायक प्रतिनिधि सनद आचार्य ने सवाल उठाया कि
“जब ₹25 करोड़ की लागत से जलापूर्ति योजना बनाई गई थी, तो मात्र चार वर्षों में यह योजना कैसे फेल हो गई? यह गंभीर जांच का विषय है।”
उन्होंने बताया कि योजना के रखरखाव (मेंटेनेंस) के लिए हर महीने लगभग ₹6 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, बावजूद इसके दो साल से लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने उपायुक्त से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से तत्काल बात की और अगले दो दिनों के भीतर जलापूर्ति बहाल करने का निर्देश दिया।
*बाईट:-सनंत आचार्य विधायक प्रतिनिधि*

