राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में जच्चा-बच्चा की दर्दनाक मौत के मामले ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद जहां एक ओर लापरवाही के गंभीर आरोप सामने आए, वहीं दूसरी ओर खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए जिम्मेदारों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि प्रसव के दौरान बिजली बाधित होने पर मोबाइल टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी कराई गई, जो न केवल मानकों के खिलाफ है बल्कि गंभीर लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण भी है। इस पूरे मामले में प्रभारी चिकित्सक डॉ शिवलाल कुंकल को निलंबित कर दिया गया है, वहीं ड्यूटी पर तैनात अन्य कर्मियों की भूमिका की भी गहन जांच जारी है।
जांच टीम ने खंगाले सभी पहलू
घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया गया, जिसमें सिविल सर्जन, विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया। टीम ने अस्पताल के ड्यूटी रोस्टर, उपकरणों की उपलब्धता, बिजली व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया की जांच की। CCTV फुटेज और मौके पर मौजूद कर्मियों से पूछताछ के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपी गई है।
खबर के बाद तेज हुई कार्रवाई
मामले के मीडिया में आने के बाद विभाग की कार्यशैली में तेजी देखने को मिली। न केवल दोषियों पर कार्रवाई हुई, बल्कि पूरे अस्पताल की व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में भी कदम उठाए गए। अस्पताल में बैकअप पावर सिस्टम की व्यवस्था सुनिश्चित करने, जरूरी उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने और स्टाफ की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए हैं।
उपायुक्त ने लिया संज्ञान, मौके पर पहुंचकर किया निरीक्षण
जिला उपायुक्त ने स्वयं राजनगर CHC पहुंचकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जच्चा-बच्चा की मौत जैसी घटनाएं किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। साथ ही, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए।
सुधार की दिशा में सकारात्मक पहल
घटना के बाद विभाग द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना भी हो रही है। जिस तत्परता से दोषियों पर कार्रवाई की गई और सिस्टम को सुधारने की पहल शुरू हुई, वह निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है। इससे यह संदेश गया है कि अब स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
स्थानीय लोगों की उम्मीदें बढ़ीं
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर इसी तरह सख्ती और निगरानी बनी रही, तो भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सकता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में मूलभूत सुविधाओं की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
राजनगर CHC की यह घटना भले ही बेहद दुखद रही हो, लेकिन इसके बाद जिस तरह विभाग ने सक्रियता दिखाई है, वह काबिले-तारीफ है। अब देखना यह होगा कि ये सुधारात्मक कदम जमीन पर कितनी मजबूती से लागू होते हैं और आम लोगों को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाती हैं या नहीं।