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आदिवासियों के अधिकार छीन रही है गठबंधन सरकार : चम्पाई सोरेन 

 

 

चाईबासा(प्रकाश कुमार गुप्ता): झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन शुक्रवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड अंतर्गत सेरेंगसिया घाटी पहुंचे। यहां उन्होंने वीर पोटो हो सहित कोल विद्रोह के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने राज्य की गठबंधन सरकार पर आदिवासी विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला।

 

चम्पाई सोरेन ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और परंपराओं की रक्षा के लिए जिन आदिवासी पूर्वजों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया, वही अधिकार आज फिर खतरे में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने वर्षों से चली आ रही परंपरा को तोड़ते हुए सेरेंगसिया के ग्रामीणों द्वारा हर साल आयोजित किए जाने वाले सांस्कृतिक और खेलकूद कार्यक्रम को जबरन रद्द करा दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था।

 

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भोगनाडीह से लेकर सेरेंगसिया तक शहीदों के परिवारों और पारंपरिक ग्राम प्रधानों के निर्णयों को नजरअंदाज कर पुलिस के बल पर आदेश थोपे जा रहे हैं, जिसे आदिवासी समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।

 

उन्होंने सारंडा क्षेत्र का मुद्दा उठाते हुए कहा कि खनन कंपनियों के हित में सरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच जाती है, लेकिन हजारों वर्षों से वहां बसे लाखों आदिवासी परिवारों की चिंता नहीं करती। उन्होंने सवाल उठाया कि वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के नाम पर आदिवासियों को उजाड़ने की साजिश क्यों की जा रही है।

 

पेसा कानून को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभा में गलत प्रावधान रखकर मनमानी का रास्ता खोला गया है। उन्होंने कहा कि जब नोवामुंडी में बिना ग्राम सभा की अनुमति 850 एकड़ जमीन हिंडाल्को को दी गई, तब सरकार किस आधार पर पेसा की बात करती है।

 

इससे पहले चाईबासा पहुंचने पर तांबो चौक समेत कई स्थानों पर नो एंट्री आंदोलनकारियों और अन्य संगठनों से जुड़े लोगों ने चम्पाई सोरेन का स्वागत किया। गीतीलता शहीद स्थल में श्रद्धांजलि देने के बाद वे सेरेंगसिया पहुंचे, जहां शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष महेन्द्र लागुरी सहित बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद थे।

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