आठ सूत्री मांगों को लेकर बीआरपी–सीआरपी महासंघ का चरणबद्ध आंदोलन, 15 से 20 दिसंबर तक विरोध सप्ताह
रांची।


बीआरपी–सीआरपी महासंघ, झारखंड प्रदेश द्वारा अपनी आठ सूत्री मांगों के संदर्भ में पत्रांक 13/2025, दिनांक 24 नवंबर 2025 को राज्य परियोजना कार्यालय को पत्र सौंपा गया था। महासंघ का कहना है कि पत्र दिए जाने के 15 दिन बीत जाने के बावजूद राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से मांगों पर अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। इससे आक्रोशित होकर महासंघ ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है।
महासंघ के अनुसार, आंदोलन के प्रथम चरण में 15 दिसंबर 2025 से 20 दिसंबर 2025 तक राज्य में कार्यरत सभी बीआरपी एवं सीआरपी काला बिल्ला लगाकर कार्य करेंगे और इस अवधि को ‘विरोध सप्ताह’ के रूप में मनाया जाएगा। इसके पश्चात 22 दिसंबर 2025 (सोमवार) को झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची स्थित कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय न्याय सभा सह धरना कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
महासंघ ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में ईपीएफ नियमावली के तहत मृत्यु लाभ प्रदान करना शामिल है। नियमावली लागू होने के बाद कई बीआरपी/सीआरपी की आकस्मिक मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके परिजनों को अब तक नियमानुसार छह लाख रुपये का लाभ नहीं मिला है। इसके साथ ही संविदा नियमावली 2024 के अनुसार मृत्यु की स्थिति में आश्रितों को अनुकंपा पर नियुक्ति देने का प्रावधान होने के बावजूद इसे अब तक लागू नहीं किया गया है।
महासंघ ने राज्य में कार्यरत बीआरपी/सीआरपी के लिए पांच लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा सुविधा देने की मांग की है। इसके अलावा वर्ष 2004 से लगातार सेवा दे रहे कर्मियों के सेवानिवृत्त होने पर किसी भी प्रकार की अनुग्रह राशि या सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिलने पर चिंता जताई गई है। महासंघ ने मांग की है कि 15 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके बीआरपी/सीआरपी को सेवानिवृत्ति पर दस लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाए।
अन्य मांगों में अर्जित अवकाश और ग्रेच्युटी का लाभ प्रदान करना, संविदा नियमावली 2024 के तहत मानदेय में प्रतिवर्ष तीन प्रतिशत वृद्धि सुनिश्चित करना, बढ़ती महंगाई और ईपीएफ कटौती को देखते हुए मूल मानदेय में 20 प्रतिशत की वृद्धि करना तथा बीआरपी/सीआरपी कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष निर्धारित करना शामिल है।
महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

