अगहन संक्रांति पर हुड़लुंग गाँव में पारंपरिक टुसु थापना, एकमासिआ टुसु परब की हुई शुरुआत
गाँव की नन्ही बच्चियों ने पूरे विधि-विधान के साथ मिट्टी के सारूआ यानी छोटी हांड़ी में तीन गोबर ढुला, तीन गुंड़ी ढुला, धान, टुस और फूल अर्पित कर कुल 13 टुसु थापना किया। यह परंपरा प्रकृति और अन्न के प्रति सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।



इस अवसर पर देसुआ आकुस झारखंड प्रदेश संयोजक प्रकाश महतो केटिआर ने बताया कि टुसु परब धान रूपी अन्न शक्ति के सम्मान से जुड़ा प्राकृतिक पर्व है, जिसे अगहन संक्रांति से पुस संक्रांति तक पूरे एक महीने हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पुस संक्रांति के दिन टुसु बिदाई के साथ पर्व का समापन होता है।
महिला संयोजक नंदिनी महतो पुनरियार ने जानकारी दी कि इस अवधि में प्रतिदिन शाम को बच्चियाँ एक-एक फूल अर्पित कर टुसु मां का सेंउरन करती हैं। हर नौ दिन में टुसु गीत और पांता नाच के साथ जागरण भी किया जाता है।

