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औषोधिय गुणों से परिपूर्ण है झारखंड में बहुतायत पाये जाने वाले पलाश वृक्ष

 

 

ईचागढ़ : झारखंड में बहुतायत रूप से पाये जाने वाले पलाश वृक्ष औषोधिय गुणों से परिपूर्ण है। यह वृक्ष उष्ण कटीबंधिया जलवायु क्षेत्र में ही सिर्फ पाया जाता है। पलाश औषोधिय गुणों के साथ प्राकृतिक सुंदरता को मदहोश करती है। नव यौवना वसंत ऋतू में पलाश के वृक्ष में लदा सिंदूरी रंग के मनमोहक फुल मौसम को और भी यौवन बना देती है। प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगाने वाले इस फुल की वृक्ष का हर अंग में औषोधिय गुण समाहित है। फुल, फल, जड़, पत्ता व तना में अलग अलग गुण है। वैद्य इस वृक्ष से कई प्रकार के दवा बनाते हैं।

 

पलाश के औषोधिय गुण

 

ग्रामीण क्षेत्र में होली का रंग अधिकांश लोग पलाश फुल से बनाते हैं। इसके रंग में कई दुष्प्रभाव नहीं है बल्कि औषोधिय गुण है। पलाश के फूलों में कई गुण समाहित है। आयुर्वेद में इनके कई गुणों का उल्लेख मिलता है। फुल को सुखाने के बाद भींगोकर इसका पानी पीने से पेट के कीड़े दूर करने में सहायक, डायबिटीज़ को नियंत्रित करती है, बवासीर में आराम मिलता है, कामोत्तेजक हैं, आंतों में अल्सर को दूर करते हैं, पेशाब खुलकर आता है, किडनी की सेहत अच्छी रहती है, आंतों की गर्मी को कम करते हैं। फूलों का इस्तेमाल सौंदर्य प्रसाधनों में भी किया जाता है। इसका जड़ कृमि नाशक है। पत्ते व्यवसायिक रूप में इस्तेमाल किया जाता है। कहा जाता है कि पलाश के पत्ते में अगर देशी भोजन पकाया जाता है तो उसके स्वाद में वृद्धि होता है और सेहत के लिए भी लाभदायक है।

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