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बाल-संवेदनशील पुलिसिंग और किशोर न्याय पर एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित

चाईबासा(प्रकाश कुमार गुप्ता): पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में गुरुवार को बाल-संवेदनशील पुलिसिंग, किशोर न्याय अधिनियम, बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण के सिद्धांत तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम–2006 विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विशेष किशोर पुलिस इकाइयों को सशक्त बनाना तथा बाल संरक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाना रहा।

 

कार्यक्रम का आयोजन पश्चिमी सिंहभूम पुलिस विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से तथा सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (सीसीआर), नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल), रांची के तकनीकी सहयोग से किया गया। कार्यशाला में जिले के विभिन्न थानों से आए 39 बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (सीडब्ल्यूपीओ) शामिल हुए।

कार्यशाला के दौरान पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने सभी थानों के बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को “बाल मित्र थाना” के निर्माण एवं संचालन के लिए निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ एवं सीसीआर, एनयूएसआरएल के सहयोग से बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों के लिए सात चरणों में संवेदनशीलता आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसका तीसरा चरण आज पूरा हुआ।

 

कार्यक्रम की शुरुआत अनिरुद्ध सरकार (सीसीआर, एनयूएसआरएल) के स्वागत भाषण एवं प्रशिक्षण-पूर्व मूल्यांकन प्रश्नावली से हुई। इसके बाद नरेंद्र शर्मा ने पूर्व प्रशिक्षणों से प्राप्त जानकारियों की पुनरावृत्ति कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।

 

तकनीकी सत्रों में गौरव, बाल संरक्षण अधिकारी, एनयूएनवी, यूनिसेफ ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 एवं झारखंड किशोर न्याय नियम 2017 के तहत बाल-संवेदनशील पुलिसिंग के प्रमुख सिद्धांतों जैसे गरिमा, भेदभाव रहित दृष्टिकोण, गोपनीयता और बाल हित को सर्वोपरि रखने पर प्रकाश डाला। साथ ही बाल भिक्षावृत्ति, मादक पदार्थों की तस्करी जैसे अपराधों की पहचान और संवेदनशील कार्यवाही की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। सीडब्ल्यूपीओ की भूमिका, बाल अनुकूल प्रक्रियाएं, पुलिस थानों में बाल मित्र वातावरण, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई, प्रोबेशन अधिकारी के साथ समन्वय, अभिलेख एवं रिपोर्टिंग जैसे विषयों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।

मुख्य सत्रों में बाल विवाह, लैंगिक शोषण और विधि से संघर्षरत बच्चों से जुड़े मामलों पर केस स्टडी आधारित अभ्यास कराया गया, जिसका संचालन गौरव कुमार ने किया। इसी क्रम में नरेंद्र शर्मा ने प्रतिभागियों के क्षमता आकलन एवं आगामी रणनीतियों पर समूह चर्चा कराई। अनिरुद्ध सरकार ने पालक देखभाल एवं बाद की देखभाल योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में पीसीआई इंडिया के सलाहकार हिमांशु जेना भी उपस्थित रहे और उन्होंने बाल विवाह उन्मूलन जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।

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