बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता रथ ने सदर अस्पताल परिसर में लोगों को किया जागरूक
चाईबासा: बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जागरूकता रथ ने दूसरे दिन सदर अस्पताल परिसर में लोगों को जानकारी दी। यह कार्यक्रम झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशानुसार आशा कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया।


इसमें कर्रा समिति और जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन संस्था का सहयोग रहा।
जागरूकता रथ के माध्यम से लोगों को बताया गया कि बाल
विवाह कानूनन अपराध है। इसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होने वाले सभी लोग बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत दोषी माने जाएंगे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि बाल विवाह न केवल सामाजिक रूप से गलत है, बल्कि वैधानिक रूप से भी अमान्य है।
आयोजकों ने जानकारी दी कि बाल विवाह से बालक और बालिका के शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर और प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कम उम्र में विवाह होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर बुरा असर पड़ता है, जिससे पूरा परिवार और समाज प्रभावित होता है।
कार्यक्रम के दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया गया और उनसे अपील की गई कि वे इस कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाएं। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि कहीं बाल विवाह की जानकारी मिले तो संबंधित विभाग या प्रशासन को सूचित करें।
आयोजकों ने बताया कि यह जागरूकता रथ आने वाले दिनों में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करेगा और लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करेगा, ताकि इस सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त किया जा सके।

