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भगवान शिव की भक्ति का पावन महीना सावन: आस्था, आत्मशुद्धि और प्रकृति से जुड़ाव का समय

 

 

सावन का महीना आते ही भगवान शिव की भक्ति में डूबने का समय आ जाता है। यह पवित्र महीना भगवान शिव को समर्पित होता है, जिन्हें त्याग, तपस्या और परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। सावन में हर सोमवार को विशेष महत्व दिया जाता है, जिसे सावन सोमवार व्रत कहा जाता है।

 

सावन सोमवार व्रत रखने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और सुख, शांति व मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं, मंदिर जाते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध व बेलपत्र अर्पित करते हैं।

 

बेलपत्र भगवान शिव को अति प्रिय है, जो उनके त्रिशूल का प्रतीक माने जाते हैं। दूध से अभिषेक करने से भगवान शिव की उग्र ऊर्जा को शांत करने की भावना है। जल अर्पण करने से नकारात्मक प्रभावों को दूर करने और कर्मशुद्धि का माध्यम माना जाता है।

 

सावन का महीना आस्था, आत्मशुद्धि और प्रकृति से जुड़ाव का महीना है। यह हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने का अवसर देता है। सावन हमें सिखाता है कि आध्यात्मिकता केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।

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