चाईबासा में जलजमाव ने खोली नगरपरिषद की पोल, हेमन्त केशरी ने उठाई जनहित की आवाज
चाईबासा:लगातार तीन दिनों से हो रही भारी बारिश ने चाईबासा नगर परिषद की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है। शहर की गलियों, मुख्य सड़कों और कई मुहल्लों में बारिश का पानी भर गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जुबली तालाब, गाड़ीखाना सहित कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति भयावह हो गई है।


इस विकट स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पिछड़ा जाति मोर्चा झारखंड के प्रदेश मंत्री हेमन्त कुमार केशरी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नगर परिषद और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गहरी नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022-23 में भी ठीक इसी तरह की स्थिति बनी थी, जिसके बाद प्रशासन ने समाधान का आश्वासन दिया था। लेकिन एक बार फिर वही हालात सामने हैं और नगर परिषद की उदासीनता स्पष्ट रूप से देखी जा रही है।
जल निकासी की समस्या, भ्रष्टाचार की ओर इशारा
श्री केशरी ने कहा कि नालियों की साफ-सफाई में हर माह जनता से वसूले गए 10-15 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद गलियों में कचरा और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नालियों के जाम होने से घरों और दुकानों में पानी घुस रहा है। वर्ष 2020 में केंद्र सरकार द्वारा कचरा निस्तारण के लिए 10 करोड़ रुपये दिए गए थे, लेकिन उसका भी कोई ठोस उपयोग नहीं हो पाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर परिषद द्वारा पारित भवन निर्माण नक्शे भी अनियमित हैं, जिससे बारिश का पानी बहने के रास्ते में रुकावट आ रही है। उन्होंने कहा कि यह नगर परिषद की लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा है कि चाईबासा जैसे जिला मुख्यालय की स्थिति आज नारकीय हो चुकी है।
प्रबुद्धजनों और सामाजिक संस्थाओं से की अपील
हेमन्त केशरी ने आम जनता, सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की है कि वे नगर परिषद की अकर्मण्यता के खिलाफ आवाज उठाएं और जिला उपायुक्त समेत राज्य के उच्च अधिकारियों को ई-मेल व पत्राचार के माध्यम से इस दुर्दशा से अवगत कराएं।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत देशभर में स्वच्छता को लेकर अभियान चल रहा है, लेकिन चाईबासा में यह योजना पूरी तरह विफल नजर आ रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मानवाधिकार आयोग और अन्य जिम्मेदार संस्थाओं को भी शहर की स्थिति से अवगत कराने की अपील की है।
सूचना अधिकार कानून के उल्लंघन का आरोप
हेमन्त केशरी ने यह भी आरोप लगाया कि नगर परिषद सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भी पारदर्शिता नहीं बरत रहा है और मांगी गई जानकारी अधूरी दी जा रही है।
अंत में उन्होंने कहा, “सरकारी तंत्र शायद किसी बड़ी त्रासदी के बाद ही जागेगा। लेकिन हम चुप नहीं बैठेंगे, जनता के हक की लड़ाई सड़क से सोशल मीडिया तक लड़ी जाएगी।”

