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चंदा का धंधा करते रह गए पूर्व प्रत्याशी, कूकड़ाडीह का कार्यक्रम निकला फ्लॉप! न तिरपाल, न कुर्सी – टाइगर जयराम को भी लेनी चाहिए सबक

झारखंड में इस बार मानसून अपना रौद्र रूप दिखा रहा है। लगभग हर दिन झमाझम बारिश हो रही है। 13 तारीख को भी भारी बारिश की संभावना पहले से ही जताई गई थी। इसके बावजूद कूकड़ाडीह में आयोजित विशाल जनसभा के आयोजक पूरी तरह से लापरवाह नजर आए।

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महीनों से गांव-गांव घूमकर पोस्टर-बैनरों के जरिए चंदा इकट्ठा किया गया, “विशाल जनसभा” के नाम पर लोगों से सहयोग मांगा गया, लेकिन जब कार्यक्रम का दिन आया, तो न तो तिरपाल की व्यवस्था थी, न ही बैठने के लिए कुर्सियाँ। व्यवस्था के नाम पर सन्नाटा पसरा रहा।

 

यह बात सही है कि टाइगर जयराम महतो को सुनने के लिए लोग किसी सुविधा की परवाह नहीं करते, लेकिन बारिश में सिर छुपाने के लिए कम से कम एक तिरपाल तो जरूरी था। महिलाएं गोद में छोटे-छोटे बच्चों को लेकर पहुंचीं, युवा दूर-दूर से किराये की गाड़ियों में पैसा जोड़कर आए। किसी ने टूटे छाते के सहारे तो किसी ने सिर पर हेलमेट लगाकर बारिश से बचने की कोशिश की और स्टेज के सामने डटे रहे।

 

लेकिन जैसे ही बारिश तेज हुई, लोग इधर-उधर भागने लगे। अफरा-तफरी मच गई। और यह सब उस वक्त हुआ जब टाइगर जयराम ने अपना भाषण शुरू ही किया था। भीड़ छंटती देख खुद जयराम महतो भी रुक गए। सम्मान को ठेस लगी। उन्होंने भारी मन से मंच पर मौजूद कुछ कार्यकर्ताओं से विदा ली और चुपचाप रवाना हो गए।

 

कार्यक्रम के आयोजक और जुगसलाई विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी विनोद स्वंशी को यह समझना चाहिए कि टाइगर जयराम केवल विधायक नहीं हैं, बल्कि एक पार्टी के सुप्रीमो भी हैं। उनकी गरिमा पर आंच आना पार्टी की छवि पर सीधा असर डालता है।

 

टाइगर जयराम महतो को भी इस घटना से सबक लेना चाहिए। आने वाले समय में उन्हें हर विधानसभा में इसी तरह के कई कार्यक्रमों में भाग लेना है। ऐसे में आयोजकों से पहले ही पूरी जानकारी लेनी चाहिए। साथ ही यह भी मंथन जरूरी है कि क्या यह सिर्फ कार्यकर्ताओं की लापरवाही थी या फिर चार संभावित प्रत्याशियों के बीच आपसी खींचतान और निजी स्वार्थ की उपज?

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