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चांडिल डेम विस्थापितों की 40 साल की पीड़ा पर फूटा गुस्सा – JLKM नेता तरुण महतो का एलान, “अब आर-पार की लड़ाई होगी”

 

चांडिल (संवाददाता):

चांडिल डेम परियोजना से विस्थापित ग्रामीणों की पीड़ा चार दशक बाद भी जस की तस है। 1984-85 में डेम निर्माण के लिए 84 मौजा की जमीन अधिग्रहित की गई थी। उस समय ग्रामीणों को पुनर्वास, नौकरी, मुआवजा और सरकारी योजनाओं का लाभ देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि आज 40 साल बीत जाने के बावजूद भी विस्थापितों को उनका हक और अधिकार नहीं मिला। सरकार से लेकर विधायक और अफसरों तक हर दरवाज़े पर गुहार लगाने के बाद भी ग्रामीणों को सिर्फ़ धोखा और ठगी का ही सामना करना पड़ा।

 

इसी दर्द को लेकर विस्थापित ग्रामीणों ने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रत्याशी तरुण महतो को बुलाया और अपनी व्यथा साझा की। ग्रामीणों की दशा देखकर तरुण महतो भड़क उठे और उन्होंने सीधे सरकार तथा वर्तमान विधायक पर हमला बोला।

 

तरुण महतो ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि विस्थापितों का सवाल 40 साल से दबाकर रखा गया है। अब और चुप्पी नहीं चलेगी। विस्थापितों के हक और अधिकार के लिए जोरदार आंदोलन होगा। विधायक मैडम के खिलाफ खुली चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि यदि तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो जनता सड़कों पर उतरेगी और आने वाले चुनाव में सत्ता पक्ष को करारी हार झेलनी पड़ेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही उन्हें जितिया नहीं मिला, लेकिन 40 हजार जनता ने उन पर भरोसा जताया है। उस भरोसे को वे टूटने नहीं देंगे और हर आंदोलन में विस्थापितों के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने घोषणा की कि अब विस्थापितों का सवाल सड़कों पर गूंजेगा और सरकार को जवाब देना ही होगा।

 

बैठक में JLKM के केंद्रीय संगठन महासचिव फूलचंद महतो, युवा मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष चेतन महतो, प्रखंड अध्यक्ष चिरंजीत महतो, उपाध्यक्ष रिंकू महतो, सक्रिय सदस्य नकुल महतो और मधु महतो समेत भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। इनमें प्रमुख रूप से सनत महतो, संतोष, सुधीर, लीलपदो कुम्हार, कर्मू कुम्हार, कालू कुम्हार, अशोक नापित, अनाथ गोराई, अंबुज कुम्हार, गोबिंदा दे, मनसा गोराई, स्वरूप गंगुली, शर्मा प्रामाणिक और बबलू प्रामाणिक शामिल थे। सभी ग्रामीणों ने आंदोलन के लिए संकल्प लिया और स्पष्ट कर दिया कि अब उनकी आवाज़ दबाई नहीं जा सकेगी।

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