डायन प्रथा सामाजिक कलंक, उन्मूलन को लेकर चलाया गया जागरूकता अभियान
जमशेदपुर, 24 फरवरी 2026। सिविल सर्जन कार्यालय, पूर्वी सिंहभूम के निर्देश पर साकची स्थित सबल सेंटर में मंगलवार को “डायन प्रथा” के खिलाफ जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम जिला स्वास्थ्य समिति, पूर्वी सिंहभूम के सौजन्य से आयोजित हुआ, जिसमें शहरी साहियाओं की सक्रिय भागीदारी रही।


सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के आदेशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में डायन प्रथा से जुड़े अंधविश्वासों और सामाजिक कुरीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव लोचन महतो ने बताया कि प्राचीन मान्यताओं के आधार पर डायन को अलौकिक शक्तियों से नुकसान पहुंचाने वाला माना जाता है। कई मामलों में संपत्ति विवाद, पारिवारिक झगड़े या व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण महिलाओं पर डायन का आरोप लगाया जाता है। विशेष रूप से विधवाओं और अकेली महिलाओं को निशाना बनाकर सामाजिक बहिष्कार या संपत्ति हड़पने की घटनाएं सामने आती हैं।
उन्होंने कहा कि स्थानीय परंपराओं में जादू-टोना से जुड़े विश्वासों का प्रभाव गहरा है और ओझा-तांत्रिकों द्वारा किसी महिला को डायन घोषित कर देना सामाजिक हिंसा को बढ़ावा देता है।
सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने अपने संबोधन में कहा कि डायन प्रथा एक गंभीर सामाजिक कुरीति और हिंसा का रूप है। इसके उन्मूलन में वैज्ञानिक सोच और शिक्षा का अभाव बड़ी बाधा है। उन्होंने बताया कि झारखंड में वर्ष 2001 में “झारखंड डायन प्रथा निवारण अधिनियम” लागू किया गया, जिसके तहत दोषियों के लिए कठोर सजा, आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और मानसिकता में बदलाव भी जरूरी है।
कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने डायन प्रथा के खिलाफ सामूहिक रूप से जागरूकता फैलाने और समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने का संकल्प लिया।
अभियान को सफल बनाने में अर्बन बीटीटी सुमी हांसदा, अमरेश मिश्रा, टेनिक महतो एवं शत्रिलोचन जी का सराहनीय योगदान रहा।

