दो भाइयों का दर्दनाक संघर्ष: पैर नहीं, फिर भी जीने की उम्मीद
गोड्डा जिले के पथरगामा प्रखंड से सामने आई यह कहानी किसी भी संवेदनशील इंसान की आंखें नम कर देने वाली है। अभिजित दास और उनके छोटे भाई सुजीत दास—दोनों भाई आज जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। गंभीर बीमारी ने उनके शरीर के साथ-साथ उनके सपनों को भी तोड़ दिया है। बीमारी की वजह से दोनों भाई अपने-अपने एक पैर पहले ही खो चुके हैं और अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि दूसरा पैर भी बचाया नहीं जा सकता।


धनबाद के गोविंदपुर स्थित निर्मला हॉस्पिटल में दोनों का इलाज चल रहा है। तीन जनवरी को अभिजित का ऑपरेशन हुआ, जिसमें दो लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। आगे और ऑपरेशन होने हैं, लेकिन परिवार की आर्थिक हालत पूरी तरह चरमरा चुकी है।
पिता मजदूरी कर परिवार का पेट पालते हैं। सीमित आमदनी में इतना बड़ा इलाज कराना उनके बस से बाहर हो गया है। दवाइयों के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। अस्पताल के बिस्तर पर कराहते बेटे और लाचार पिता—यह दृश्य दिल को झकझोर देता है।
अभिजित और सुजीत आज समाज से मदद की गुहार लगा रहे हैं। उन्हें सहानुभूति नहीं, सहयोग चाहिए—ताकि इलाज पूरा हो सके और उन्हें फिर से जीने की उम्मीद मिल सके।

