“दोहरे लाभ के विरुद्ध सड़कों पर उतरी निशा भगत, मुंडन कर कराया विरोध”
निशा भगत ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और पहचान निरंतर क्षीण हो रही है। उनके अनुसार, धर्मांतरण के बाद भी अनेक लोग एसटी के लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जिससे मूल आदिवासी समुदाय के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं और आरक्षण के लाभ “दोहरे तरीके” से उठाए जा रहे हैं।



नेत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मुस्लिम परिवार आदिवासी बेटियों से विवाह कर मायके से जाति और आवासीय प्रमाण पत्र बनवा लेते हैं तथा आदिवासी समुदाय के लिए निर्धारित योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इसे उन्होंने व्यवस्था की गंभीर खामी बताया।
निशा भगत ने सरना संस्कृति की रक्षा, धर्मांतरित आदिवासियों की डीलिस्टिंग, और सर्ना कोड लागू करने की मांग को मजबूती से दोहराया। आंदोलन स्थल पर उपस्थित समर्थकों ने भी आदिवासी पहचान एवं अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता प्रदर्शित की।

