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दूधमटिया पर्यावरण मेला 30 वर्षों से पेड़ों की सुरक्षा का संदेश फैलाता रहा

 

हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड में आयोजित दूधमटिया पर्यावरण मेला 30 वर्षों से वृक्षों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है। इस पहल की शुरुआत 1999 में सेवानिवृत्त शिक्षक महादेव महतो ने की थी। उनका मानना था कि वृक्ष ही जीवन का आधार हैं, इसलिए उन्होंने पेड़ों की अंधाधुंध कटाई रोकने और ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए यह मेले की शुरुआत की।

 

महादेव महतो ने स्थानीय लोगों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जोड़ने के लिए गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उपयोग किया। गांव के लोग रक्षाबंधन की तरह पेड़ों की सुरक्षा की शपथ लेते और यह सुनिश्चित करते कि वृक्षों की कटाई न हो।

 

आज दूधमटिया पर्यावरण मेला केवल हजारीबाग ही नहीं, बल्कि अन्य छह राज्यों में आयोजित हो रहा है। वन विभाग और स्थानीय वन समितियों के सहयोग से मेले में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें पर्यावरण जागरूकता स्टॉल और वृक्ष संरक्षण पर केंद्रित गतिविधियां शामिल हैं।

 

महादेव महतो की यह पहल अब अन्य वन महोत्सवों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। यह मेले समाज के प्रत्येक व्यक्ति से अपील करता है कि वे प्राकृतिक संसाधनों और वृक्षों की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली को बनाए रखें।

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