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ईचागढ़ पुलिस पर उठे गंभीर सवाल, अवैध धंधे की मिलीभगत और नकली चौकीदार की मौत ने खोली पोल

 

 

ईचागढ़, 30 अगस्त : ईचागढ़ थाना क्षेत्र में पुलिस की नाकामी और मिलीभगत अब खुलकर सामने आ रही है। क्षेत्र में अवैध बालू खनन और परिवहन खुलेआम जारी है। पातकुम रोड पर रोज़ाना सैकड़ों अवैध बालू लदे ट्रैक्टर दौड़ते हैं, लेकिन ईचागढ़ पुलिस आँख मूंदकर खामोश बैठी रहती है। यही नहीं, इलाके में अवैध स्क्रैप टाल, आयरन ओर टाल और कोयला टाल का कारोबार भी फल-फूल रहा है। सवाल उठता है—क्या पुलिस की सरपरस्ती के बिना यह सब संभव है?

 

शुक्रवार को हुई एक सड़क दुर्घटना ने पुलिस की कार्यशैली की पोल पूरी तरह खोल दी। गौरांगकोचा निवासी नारायण गोराई की मौत एनएच-33 पर हुई। चौंकाने वाली बात यह है कि मृतक को ईचागढ़ थाना प्रभारी ने कथित तौर पर सुरक्षा ड्यूटी पर लगाया था, जबकि नारायण गोराई वास्तविक रूप से चौकीदार था ही नहीं। इसके बावजूद वह खाकी वर्दी पहनकर ड्यूटी कर रहा था। यानी थाना परिसर से लेकर सड़क तक, पुलिस ने फर्जी चौकीदार बनाकर ड्यूटी करवाने की शर्मनाक मिसाल पेश की है।

 

ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस आम लोगों की गाड़ियों को तो रोककर घंटों परेशान करती है, लेकिन जब बात अवैध खनन और ट्रैक्टर-ट्रेलर से हो रहे गोरखधंधे की आती है, तो थाना मूकदर्शक बन जाता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह सबकुछ ऊपर तक हिस्सेदारी पहुँचाने वाली संगठित मिलीभगत का हिस्सा है।

 

ईचागढ़ पुलिस की इस भूमिका ने कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि न केवल अवैध कारोबार बल्कि फर्जी चौकीदार मामले की भी उच्चस्तरीय जांच हो और दोषी पुलिस पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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