ईचागढ़ : सड़क हादसे में मृत अनधिकृत चौकीदार नारायण गोराई मामले को रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने लिया संज्ञान
ईचागढ़: 30 अगस्त ईचागढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत एनएच-33 (टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग) स्थित नागासेरेंग में शुक्रवार को हुए सड़क हादसे में गौरांगकोचा निवासी नारायण गोराई की मौत के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। नारायण गोराई कोई आधिकारिक चौकीदार नहीं थे, फिर भी उन्हें पुलिस की ओर से सुरक्षा ड्यूटी में लगाया जाता था। इसी दौरान तेज रफ्तार टेलर और ट्रक के बीच हुई टक्कर की चपेट में आकर उनकी मौके पर ही मौत हो गई।


रक्षा राज्यमंत्री ने लिया गंभीरता से संज्ञान
भाजपा के पूर्व जिला परिषद सदस्य सह जिला महामंत्री मधुसूदन गोराई ने मृतक नारायण गोराई से जुड़ी पूरी घटना और तथ्यों की जानकारी रक्षा राज्यमंत्री सह रांची सांसद संजय सेठ को दी। इस पर मंत्री ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने मधुसूदन गोराई को निर्देश दिया है कि इस मुद्दे को जिला समाहरणालय में आयोजित होने वाली “दिशा” की बैठक में मजबूती से उठाया जाए।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद ईचागढ़ पुलिस की भूमिका और कार्यशैली सवालों के घेरे में है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि जब नारायण गोराई आधिकारिक चौकीदार नियुक्त ही नहीं थे, तो उन्हें बार-बार सुरक्षा ड्यूटी में क्यों लगाया जाता था? आखिर किसके आदेश पर ईचागढ़ थाना प्रभारी ने शुक्रवार को उन्हें वीवीआइपी के आगमन को लेकर नागासेरेंग में तैनात किया था?
ग्रामीणों का आरोप है कि नारायण गोराई को अक्सर पुलिस द्वारा सुरक्षा कार्यों में लगाया जाता था और वे हमेशा खाकी वर्दी में रहते थे। उनका कहना है कि यदि किसी सरकारी कार्य के दौरान उनकी मौत हुई है तो परिजनों को वैसा ही मुआवजा मिलना चाहिए जैसा किसी सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान मौत पर मिलता है।
आक्रोश और मुआवजे की मांग
मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन से नारायण गोराई की सेवा को मान्यता देने और परिवार को उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग की है। भाजपा नेता भूषण मुर्मू पहले ही इस मामले में आवाज उठा चुके हैं और अब केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री सह सांसद संजय सेठ द्वारा संज्ञान लिए जाने से ग्रामीणों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।


