गिरफ्तारी से मुठभेड़ तक… गोड्डा के कुख्यात सूर्या हांसदा की कहानी में रहस्य बरकरार
गोड्डा : बोआरीजोर और ललमटिया थाना क्षेत्र में लंबे समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बने कुख्यात सूर्या हांसदा का पुलिस मुठभेड़ में अंत हो गया। रविवार देर शाम उसके गिरफ्तारी की खबर आई थी, जबकि सोमवार सुबह मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना फैली। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब उसे गिरफ्तार किया गया था, तो फिर मुठभेड़ कैसे हुई? क्या वह पुलिस की गिरफ्त से फरार हो गया था या इसके पीछे कोई और कहानी है—इस पर पुलिस ने अब तक आधिकारिक बयान नहीं दिया है।


कौन था सूर्या हांसदा
सूर्य नारायण हांसदा उर्फ सूर्या हांसदा, अपराध की दुनिया के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय रहा। शुरुआत में ललमटिया कोल माइंस क्षेत्र से आपराधिक गतिविधियों के जरिए चर्चा में आया। उसका प्रभाव इतना था कि विभिन्न राजनीतिक दलों से उसकी नजदीकी बनी रहती थी। 44 वर्षीय सूर्या दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुका था—पहली बार 2014 में झारखंड विकास मोर्चा से और फिर 2019 में भाजपा में शामिल हुआ, लेकिन टिकट न मिलने पर नाराज होकर 2024 में झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा (JLKM) से चुनाव लड़ा, हालांकि जीत हासिल नहीं कर सका।
परिवारिक पृष्ठभूमि
सूर्या की मां नीलमुणी हांसदा भी एक बार जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं, हालांकि पुनः चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
मुठभेड़ के बाद की कार्रवाई
पुलिस ने सूर्या के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, गोड्डा भेजा है। मौके से हथियार भी बरामद किए गए हैं। अब सभी की निगाहें पुलिस की उस आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर टिकी हैं, जो इस गिरफ्तारी और मुठभेड़ की पूरी कहानी साफ कर सकती है।

