“गम्हरिया के रसूखदार पीडीएस डीलर पर बार-बार कालाबाजारी का आरोप, फिर भी कार्रवाई शून्य!”
सरायकेला: जिले के गम्हरिया प्रखंड के बोलाईडीह के पीडीएस डीलर प्रदीप ठाकुर बड़े रसूखदार डीलर हैं यही कारण है कि उनपर बार- बार कालाबाजारी का आरोप लगने के बाद भी किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. यहां तक कि स्टॉक मिलान में गड़बड़ी और भंडार गृह में खाद्यान्न शून्य की पुष्टि के बाद भी उन्हें क्लीन चिट मिलना कई सवालों को जन्म दे रहा है.


उनपर आरोप है कि उन्होंने पिछले तीन महीने से कार्डधारियों को पूरा राशन नहीं दिया है. मिली जानकारी के अनुसार जुलाई महीने में केवल 43.44 प्रतिशत, अगस्त में 46 प्रतिशत और सितंबर में अब तक मात्र 60 प्रतिशत खाद्यान्न वितरण हुआ है. जबकि विभाग के गोदाम से उन्होंने शत- प्रतिशत खाद्यान का उठाव कर लिया है. उपभोक्ताओं ने बताया कि जब भी वे दुकान पर जाते हैं, दुकान बंद मिलती है. कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि उनका अंगूठा लगवा लिया गया है मगर खाद्यान्न उन्हें अब तक नहीं दिया गया है. इस पर जब डीलर से पूछा गया तो उनका कहना था कि ई-पॉस मशीन की समस्या और उनकी खराब तबीयत के कारण शत प्रतिशत वितरण संभव नहीं हो पा रहा है. वहीं उन्होंने यह भी कहा कि बचे हुए अनाज को अगले महीने के कोटे से काट लिया जाता है. मगर आरोप लगने के बाद न तो विभागीय स्तर पर जांच हुई न स्टॉक मिलान किया गया. सूत्र बताते हैं कि डीलर ने सितंबर महीने के 40 फीसदी खाद्यान्न की कालाबाजारी कर ली है और तबियत ख़राब होने का बहाना बनाकर जांच कराने से भाग रहे हैं. मालूम हो कि तत्कालीन प्रभारी एमओ ने जांच में गड़बड़ी पाई थी. शो कॉज भी किया था मगर बाद में बिना किसी कार्रवाई के डीलर को क्लीन चिट दे दिया गया. अंदर खाने की माने तो डीलर की पहुंच ऊपर तक है और इस पहुंच का फायदा उठाकर वे सरकारी अनाज की जमकर कालाबाजारी कर रहे हैं. इस स्थिति से गरीब उपभोक्ता परेशान हैं और विभागीय उदासीनता पर सवाल उठा रहे हैं. उल्लेखनीय है कि पूर्व जिला आपूर्ति पदाधिकारी झुनू कुमार मिश्रा द्वारा प्रदीप ठाकुर के दुकान का निरीक्षण किया गया था जिसमें कई गड़बड़ियां पाई गई थी मगर बाद में प्रदीप ठाकुर ने अपनी पहुंच का फायदा उठाकर सब कुछ मैनेज कर लिया. अब बड़ा सवाल यह है कि गरीब उपभोक्ता जाएं तो कहां जाएं और कब उन्हें उनका पूरा हक मिलेगा. बताया जाता है कि वर्तमान अंचल अधिकारी सह एमओ ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है मगर कार्रवाई कागजों तक सिमट कर रह गई है. प्रदीप ठाकुर से जब पूछा गया तो उन्होंने ढिठई से जवाब देते हुए कहा कि “हमाम में सब नंगे हैं” नीचे वाला हो या ऊपरवाला ज़ब हिस्सेदारी समय पर पहुंचती ही है तो डर किस बात का.

