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ग्रामसभाओं में सर्वसम्मति से पास हुआ प्रस्ताव – अब “कुरमाली” नहीं, सही वर्तनी होगी कुड़मालि

 

 

चांडिल, 28 अगस्त। झारखंड की द्वितीय राजभाषा के रूप में शामिल कुरमाली की जगह अब सही वर्तनी कुड़मालि को मान्यता देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। उपायुक्त सरायकेला-खरसावां के निर्देश पर पंचायत स्तर पर आयोजित ग्राम सभाओं में सर्वसम्मति से कुड़मालि वर्तनी को पास किया गया।

 

आज चांडिल प्रखंड के उरमाल, हेंसाकोचा, मातकमडीह, खूंटी, चौका, घोड़ानेगी, चांडिल, रुदिया, भादुड़ीह और आसानबनी पंचायत भवन में आयोजित बैठकों में यह प्रस्ताव स्वीकार किया गया। अब तक कुरमाली/कुर्माली जैसी वर्तनियाँ प्रचलित थीं, जिन्हें गलत माना गया।

 

कुड़मि समाज चांडिल के जनसंपर्क सचिव गुणधाम मुतरुआर ने कहा कि कुड़मालि भाषा प्राकृत और अपभ्रंश से विकसित होकर झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के अनेक हिस्सों में बोली जाती है। इसकी जड़ें लोकगीतों, कहानियों, पर्व-त्योहार और कृषि आधारित जीवनशैली से गहराई से जुड़ी हैं। करम, सोहराय और टुसु-परब जैसे पर्वों में यह भाषा आज भी जीवंत संस्कृति के रूप में मौजूद है।

 

उन्होंने कहा कि यह केवल शब्द की शुद्धि का प्रश्न नहीं, बल्कि समाज की अस्मिता और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ा हुआ मुद्दा है। राज्य सरकार अब ग्राम सभाओं की रिपोर्ट लेकर वर्तनी की मान्यता की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करेगी।

 

भाषा प्रेमियों का कहना है कि कुड़मालि को वास्तविक सम्मान तभी मिलेगा, जब इसे शिक्षा, साहित्य और प्रशासन में समान महत्व दिया जाएगा।

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