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होली पर सील काउंटर… फिर भी धड़ल्ले से शराब बिक्री! सरायकेला में सिस्टम पर बड़े सवाल  

 

होली जैसे बड़े पर्व पर झारखंड में हर साल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकारी शराब दुकानों को बंद रखने का आदेश दिया जाता है। अबकारी विभाग द्वारा होली की पूर्व संध्या पर काउंटर के शटर पर ताला लगाकर लाल कपड़ा और सील कर दिया जाता है, ताकि त्योहार के दिन शराब की बिक्री पूरी तरह बंद रहे।

 

इस नियम का उद्देश्य साफ होता है—होली के दौरान नशे की वजह से होने वाले झगड़े, दुर्घटनाओं और असामाजिक घटनाओं को रोकना।

लेकिन सरायकेला ज़िले से सामने आई तस्वीर इन नियमों की हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

 

आरोप है कि होली के दिन कागज़ों में तो शराब काउंटर सील रहे, लेकिन हकीकत में काउंटर के आसपास की दुकानों और परचून की आड़ में शराब की बिक्री धड़ल्ले से होती रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मौके का फायदा उठाकर शराब माफियाओं ने खुलेआम मोटी कमाई की।

 

एक शराब विक्रेता ने ऑफ कैमरा दावा किया कि होली जैसे त्योहार उनके लिए सबसे बड़ा कारोबार का मौका होता है। उसके अनुसार, सिर्फ एक दिन में करीब 5 लाख रुपये तक की बिक्री हो जाती है और लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा निकल आता है।

 

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब काउंटर आधिकारिक तौर पर सील रहते हैं, तो फिर शराब बाहर कैसे पहुंचती है?

 

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इस अवैध कारोबार को चलाने के लिए कई स्तर पर “मैनेजमेंट” करना पड़ता है। चर्चा यह भी है कि अबकारी विभाग के इंस्पेक्टर नीरज सिंह और अखिलेश झा के नाम इस कथित सेटिंग में लिए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पूरे मामले को लेकर ज़िले में चर्चा तेज है और निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।

 

लोगों का आरोप है कि जब इतनी बड़ी सेटिंग की बात होती है, तो कई जगह ओरिजिनल शराब के साथ डुप्लीकेट शराब भी बेची जाती है, जिससे मुनाफा सीधे 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

 

मौके से सामने आए फुटेज में कथित तौर पर काउंटर के आसपास दुकानों में शराब बेची जाती दिख रही है। इतना ही नहीं, ज़िले के कई शराब काउंटरों के पास स्थित होटलों और ढाबों में बैठाकर शराब पिलाने का भी आरोप लगाया जा रहा है।

 

अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ अबकारी नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

 

अब ज़रूरत है कि इस पूरे मामले पर ज़िला उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) संज्ञान लें और यह जांच कराएं कि—

• होली के दिन सील काउंटर के बावजूद शराब कहाँ से बिक रही थी

• इस कथित अवैध कारोबार में किन-किन लोगों की भूमिका है

• और आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है

 

क्योंकि अगर यह सब सच है, तो होली पर शराब बंदी का नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह जाता है।

 

अगले वीडियो में हम आपको सबूत के साथ दिखाएंगे, जहां कथित तौर पर एक दारू माफिया ऑफ कैमरा यह दावा करता है कि काउंटर से जुड़े लोग ही शराब बेचने के लिए कहते हैं और किसी का डर नहीं होता, क्योंकि थाना से लेकर ऊपर तक सब सेट होने की बात कही जाती है।

 

अब देखना होगा कि सरायकेला प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कार्रवाई करता है।

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