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झामुमो ने स्थापना दिवस को बनाया राजनीतिक शोकेस: आजसू का आरोप

आजसू पार्टी ने झारखंड सरकार पर स्थापना दिवस कार्यक्रम को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष और झारखंड आंदोलनकारी प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि राज्य स्थापना दिवस को झामुमो के महिमामंडन में बदल दिया गया, जबकि समारोह का उद्देश्य राज्य निर्माण में सभी संगठनों और शहीदों के योगदान को याद करना होना चाहिए था।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों से लेकर कॉफी टेबल बुक और मंचीय प्रस्तुति तक, हर जगह सिर्फ शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन को प्रमुखता दी गई। बिरसा मुंडा, अन्य शहीदों और आंदोलनकारी संगठनों के योगदान का उल्लेख नगण्य रहा। राजधानी में लगे होर्डिंग्स में भी बिरसा मुंडा की जगह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीरें प्रमुख रहीं।

 

प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि झारखंड आंदोलन में गुरुजी की भूमिका को कोई नकार नहीं सकता, लेकिन झामुमो को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि यूपीए सरकारों में रहते हुए अलग राज्य का गठन क्यों नहीं हुआ। आजसू के एनडीए से जुड़ने के बाद ही राज्य निर्माण की प्रक्रिया क्यों आगे बढ़ी। उन्होंने कहा कि 1989 और 1999 में आजसू के आंदोलन के प्रभाव में ही केंद्र सरकार को वार्ता के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप 2000 में झारखंड राज्य का गठन संभव हो सका।

 

उन्होंने स्थापना दिवस में आजसू व अन्य आंदोलनकारी संगठनों की उपेक्षा को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

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