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जमशेदपुर में रची-बसी प्रेम कहानी: सोशल मीडिया पर छा रही अजिताभ बोस निर्देशित मिनी लव सीरीज़ ‘जमशेदपुर इश्क़ और तुम’

जमशेदपुर.

शहर की गलियों, यादों और पहले प्यार की मासूम भावनाओं को सहेजती मिनी लव सीरीज़ ‘जमशेदपुर इश्क़ और तुम’ इन दिनों सोशल मीडिया पर खासा चर्चा में है. यह भावनात्मक और सादगी भरी वेब सीरीज़ मशहूर लेखक सह प्रकाशक अजिताभ बोस के उपन्यास ‘ये बारिश इश्क और तुम’ पर आधारित है, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट का निर्देशन भी किया है. सीरीज़ की कहानी पहले प्यार की कोमल अनुभूतियों के साथ-साथ जमशेदपुर के प्रति गहरे प्रेम व जुड़ाव को बेहद खूबसूरती से दर्शाती है. स्थानीय पृष्ठभूमि में फिल्माई गई यह सीरीज़ दर्शकों को भावनात्मक रूप से शहर से जोड़ने में सफल रही है.

 

 

इस सीरीज में मुख्य भूमिकाओं में नीरू शॉ और रितिक मज़ुमदार नज़र आ रहे हैं. कैमरा वर्क शुभम सुरवे और हरिवंश प्रसाद ने संभाला है, जबकि आकर्षक ड्रोन शॉट्स विश्वजीत कुमार और तुषार सागर ने फिल्माए हैं.

 

 

सीरीज़ का नैरेशन रवि सोलंकी ने लिखा है और अपनी आवाज़ भी दी है. एडिटिंग नवनीत ने की है, वहीं संगीत मंजोत सिंह खालसा का है, जो कहानी के भावनात्मक पक्ष को और गहराई देता है. इस वेब सीरीज़ का निर्माण मीना बोस और निहारिका मिश्रा ने किया है.

 

 कुल छह एपिसोड की इस सीरीज़ की शूटिंग पूरी तरह जमशेदपुर में की गई है. कुल छह एपीसोडों की इस सीरीज के अब तक तीन एपिसोड रिलीज़ हो चुके हैं, जिन्हें सोशल मीडिया पर मिलियन से अधिक व्यूज़ मिल चुके हैं.

 

 

‘जमशेदपुर इश्क़ और तुम’ न केवल देशभर के दर्शकों का ध्यान खींच रही है, बल्कि जमशेदपुर के लोगों के बीच इसे खासा प्यार मिल रहा है. यह सीरीज़ अजीताभ बोस के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर उपलब्ध है, जहाँ दर्शक इस अनकही प्रेम कहानी को देख और महसूस कर सकते हैं.

 

बता दें कि अजिताभ बोस अंग्रेजी के मशहूर लेखक, प्रकाशक, उद्यमी, डिजाइनर व फिल्म मेकर हैं. वे भारत में पाॅकेट बुक को प्रचलित करने के लिए जाने जाते हैं. वे अपना पब्लिकेशन हाउस भी चलाते हैं, जिसके माध्यम से वे नवोदित लेखकों को सहयोग प्रदान करते हुए एक मंच प्रदान करते हैं.

 

हालांकि उन्होंने हिन्दी में भी एक किताब लिखी है, जिस पर यह सीरीज बनी है. उनकी हर किताब में कहीं न कहीं जमशेदपुर की पृष्ठभूमि झलकती है. वे दिल्ली में रहते हैं, लेकिन उनका दिल अपने शहर जमशेदपुर के लिए धड़कता है. छुट्टी मिलते ही वे जमशेदपुर आते हैं. बकौल अजिताभ–“जमशेदपुर मेरा शहर, मेरा घर है. यहां के लोग मेरा परिवार है. जमशेदपुर मेरा सब कुछ है.

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