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जन-मुक्ति संघर्ष वाहिनी ने दी श्रद्धांजलि, कहा – आपकी कमी हमेशा खलेगी

 

 

रांची, 5 अगस्त।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और आदिवासी समाज के पथप्रदर्शक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर जन-मुक्ति संघर्ष वाहिनी (झारखंड) की ओर से गहरा शोक प्रकट किया गया है। संगठन ने उन्हें अंतिम जोहार अर्पित करते हुए कहा कि “आपकी कमी हमेशा खलेगी।”

 

दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में सोमवार को 81 वर्ष की उम्र में शिबू सोरेन का निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे दिशोम गुरु के निधन की खबर से पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई। जन-मुक्ति संघर्ष वाहिनी ने इसे राज्य के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि “इतिहास रचने वाला वह महान व्यक्तित्व अब इतिहास बन गया।”

 

संगठन के संयोजक शशांक शेखर और सह-संयोजक मंथन ने एक स्वर में कहा कि गुरूजी का जीवन संघर्ष, सेवा और संघर्षशीलता का प्रतीक रहा। उनके अधूरे सपनों को पूरा करना अब झारखंड की जनता की जिम्मेदारी है।

 

संघर्ष से बनी एक विरासत

 

दिशोम गुरु का जन्म वर्ष 1944 में तत्कालीन हजारीबाग जिले (वर्तमान रामगढ़) के नेमरा गांव में हुआ था। स्कूली शिक्षा के दौरान ही उनके पिता सोबरन माझी की हत्या साहूकारों के गुंडों ने कर दी थी। उसी दिन से उनके भीतर अन्याय के खिलाफ लड़ने का संकल्प पैदा हुआ।

 

18 वर्ष की उम्र में उन्होंने ‘संथाल नवयुवक संघ’ की स्थापना की और 1972 में ए.के. राय और विनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा की नींव रखी।

वे जमींदारों और साहूकारों के खिलाफ आंदोलन के अगुआ बने और आदिवासियों की जमीन की रक्षा के लिए निर्णायक भूमिका निभाई।

 

70 के दशक में उन्होंने रात्रि पाठशाला की शुरुआत की ताकि आदिवासी समाज को शिक्षा से जोड़ा जा सके। संसद में पहला भाषण उन्होंने शराबबंदी पर दिया और हमेशा आदिवासी समाज के विकास के लिए चिंतित रहे।

 

जनता के अभिभावक रहे दिशोम गुरु

 

दिशोम गुरु को झारखंड का हर तबका सम्मान और प्रेम देता था। वे एक जननायक के रूप में उभरे, जिन्होंने आदिवासी, वंचित, किसान, मज़दूर और युवाओं को जागरूक करने का कार्य किया।

 

कार्यकारिणी सदस्य भाषाण मानमी, कुमार दिलीप, अमर सेंगेल, अरविंद अंजुम, बायला मानमी, दिलीप वाहिनी आदि ने कहा कि शिबू सोरेन न केवल एक राजनेता, बल्कि विचारधारा थे, जो हमेशा झारखंड के आत्मसम्मान और अस्तित्व के लिए संघर्षरत रहे।

 

 

 

अब जब दिशोम गुरु हमारे बीच नहीं हैं, उनकी विचारधारा ही आगे का मार्गदर्शन करेगी। जन-मुक्ति संघर्ष वाहिनी ने उन्हें नमन करते हुए उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प दोहराया है।

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