कागजों में कार्रवाई, जमीन पर अवैध बालू का खेल, ईचागढ़ क्षेत्र में रात के अंधेरे में जारी उत्खनन और परिवहन
सरायकेला: सरायकेला खरसावां जिले में अवैध बालू उत्खनन पर रोक लगाने के लिए प्रशासन लगातार बैठकें और कार्रवाई का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। बुधवार को जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला स्तरीय माइनिंग टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिला खनन पदाधिकारी द्वारा पिछले 48 दिनों की कार्रवाई का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। बैठक में अवैध खनन के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर अधिकारियों ने संतोष भी जताया।हालांकि, स्थानीय सूत्रों का दावा है कि बैठक खत्म होने के कुछ ही घंटे बाद ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में रात के अंधेरे में खुलेआम बालू का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी रहा। बताया जा रहा है कि कई जगहों पर नदी घाटों से ट्रैक्टरों के जरिए बालू उठाव कर बेरोकटोक ढुलाई की जा रही है।सूत्रों के अनुसार इस पूरे खेल में ऊपर से लेकर नीचे तक मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है, जिसके कारण बालू माफिया बेखौफ होकर अपना काम कर रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बालू माफिया छोटे-छोटे ट्रैक्टर संचालकों को रोजगार का लालच देकर उनसे बालू का उत्खनन और परिवहन करवा रहे हैं।बताया जाता है कि बालू माफिया एक ट्रैक्टर बालू करीब 650 रुपये में खरीदते हैं, जबकि नदी से बालू उठाव करने में ट्रैक्टर संचालकों का लगभग 550 रुपये खर्च हो जाता है। इस तरह एक ट्रिप में उन्हें महज करीब 100 रुपये का ही फायदा मिल पाता है। दूसरी ओर यही बालू बड़े वाहनों के जरिए हाईवे या बाजार तक पहुंचने पर 35 से 40 हजार रुपये तक में बेचा जाता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि कमजोर और छोटे ट्रैक्टर संचालकों को आगे कर बालू माफिया बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार कर रहे हैं। यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो इस अवैध धंधे से जुड़े कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध बालू उत्खनन पर सख्ती से रोक लगाई जाए और इस कारोबार में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर अंकुश लगाया जा सके।



