खरसावां में काली पूजा की तीन सौ साल पुरानी परंपरा आज भी जीवित
खरसावां के सरकारी काली मंदिर में काली पूजा की परंपरा लगभग 300 वर्षों से जारी है। यह पूजा रियासत के समय से शुरू हुई थी और आज भी राजा राजवाड़े की परंपरा के अनुसार आयोजित की जाती है। सरकार द्वारा पूजा के लिए आवंटन किया जाता है और पिछले वर्ष इस पर लगभग 60 हजार रुपये खर्च हुए थे। कहा जाता है कि खरसावां रियासत की स्थापना 1667 में हुई थी और इसके बाद ही काली पूजा का सिलसिला शुरू हुआ। रियासत के कुल 13 शासकों ने इसे लगातार जारी रखा।


1947 में भारत की आजादी के बाद खरसावां रियासत का विलय भारत गणराज्य में हुआ। तत्कालीन राजा श्रीराम चंद्र सिंहदेव और बिहार सरकार के बीच हुए मर्जर एग्रीमेंट के तहत, खरसावां में काली पूजा सहित अन्य प्रमुख त्योहार सरकारी स्तर पर आयोजित होते रहे हैं।
इस वर्ष भी काली पूजा को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। 13 अक्टूबर को अंचल कार्यालय में पूजा समिति की विशेष बैठक आयोजित होगी। बैठक में बजट और पूजा आयोजन की सभी तैयारियों पर चर्चा की जाएगी। खरसावां के सीओ कप्तान सिंकु ने पूजा समिति के सभी सदस्यों से अपील की है कि वे बैठक में अवश्य उपस्थित रहें, ताकि पूजा सुचारू रूप से और पारंपरिक विधि से सम्पन्न हो सके।

