कोल्हान विश्वविद्यालय के TRL विभाग में ‘ब्हा सह सरहुल मिलन समारोह’ का आयोजन

चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (TRL) विभाग के विभागीय सभागार में गुरुवार को “ब्हा सह सरहुल मिलन समारोह” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष सह मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ. तपन कुमार खाँड़ा ने की। समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् से हुई, जबकि समापन राष्ट्रीय गान के साथ किया गया।


समारोह में हो समाजसेवी, लेखक एवं कवि सोनु हेस्स:, उड़ीसा से आए कुडमालि कवि निरंजन महांता, समाजसेवी सुभाष महांता, रत्नाकर महांता तथा आकाशवाणी चाईबासा के नित्यानंद महतो बतौर वक्ता उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत साल फूल और पारंपरिक अंगवस्त्र देकर किया गया। इस अवसर पर कुडमालि भाषा के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया।

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ साल वृक्ष में जल अर्पित कर किया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने गोहारी गीत प्रस्तुत कर प्रकृति वंदना की। स्वागत भाषण डॉ. बसंत चाकी ने दिया। उन्होंने कहा कि TRL विभाग अपनी संस्कृति और परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है, इसलिए ऐसे आयोजनों का निरंतर होना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी भाषाई और सांस्कृतिक विरासत पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शोध करने तथा समाज को नई दिशा देने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में ब्हा और सरहुल पर्व की सांस्कृतिक, सामाजिक और प्राकृतिक महत्ता पर प्रकाश डाला। निरंजन महांता ने कहा कि प्रकृति कुड़मी समाज के जीवन का अभिन्न अंग है और उनकी जीवनशैली प्रकृति के अनुरूप रही है। उन्होंने सरहुल को परंपरा से जुड़ा पर्व बताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान उन्होंने सरहुल से संबंधित एक गीत भी प्रस्तुत किया।
सोनु हेस्स: ने सरहुल को प्रकृति का पर्व बताते हुए कहा कि मनुष्य का संपूर्ण अस्तित्व प्रकृति पर आधारित है, इसलिए प्रकृति से प्रेम और उसका सम्मान करना सभी का दायित्व है।
समारोह को सुभाष महांता और नित्यानंद महतो ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. विजय पीयूष, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज कैवर्त, बांग्ला विभागाध्यक्ष डॉ. संचिता भूंई सैन, दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना कुमारी गुप्ता, ओड़िया विभागाध्यक्ष डॉ. विधु भूषण भुइयां तथा कॉमर्स डीन डॉ. मंगला श्रीवास्तव ने भी प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहरों को बचाए रखने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. तपन कुमार खाँड़ा ने कहा कि प्रकृति हमारी जननी है और इसकी रक्षा करना हम सबका परम कर्तव्य है। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं और विद्यार्थियों का आभार जताते हुए ऐसे आयोजनों में भविष्य में भी सहभागिता की अपेक्षा व्यक्त की। कार्यक्रम का संचालन TRL विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं कुडमालि विषय प्रभारी डॉ. सुभाष चंद्र महतो ने किया।
समारोह में TRL विभाग के हो, कुड़माली और संथाली के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को उत्सवी बना दिया। कार्यक्रम में शिक्षण सहायक रामदेव बोयपाई, दिकु हांसदा तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। पूरा आयोजन हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

