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“मैं जीना चाहती हूँ…” टीबी से जूझ रही गुरुवारी अपने दो मासूम बच्चों के लिए लड़ रही है जिंदगी की लड़ाई

जमशेदपुर, संवाददाता।

बागबेड़ा नया बस्ती रोड नंबर–2, साईं बाड़ी की 28 वर्षीय गुरुवारी इन दिनों जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रही है। टीबी सहित अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित गुरुवारी की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। गरीबी इतनी हावी है कि दवा, भोजन और उपचार—सब कुछ उसके लिए अब एक संघर्ष बन चुका है।

 

गुरुवारी चाहकर भी अपना इलाज नहीं करा पा रही। घर में आर्थिक स्थिति बदहाल है, दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है। बावजूद इसके, गुरुवारी की आँखों में जीने की एक लौ अब भी जल रही है—उसके दो मासूम बच्चों के लिए।

 

गुरुवारी का पाँच वर्षीय बेटा दिव्यांग है, जबकि दूसरा बेटा मात्र एक साल का है। दोनों बच्चों को देखकर वह टूटती नहीं, बल्कि हर दिन लड़ने का हौसला जुटाती है। उसकी आँखों में आंसू हैं, मगर दिल में उम्मीद है कि कोई फ़रिश्ता आएगा और उसके जीवन में फिर से उजाला भर देगा।

 

स्थानीय लोगों के अनुसार, गुरुवारी की स्थिति बेहद दयनीय है। परिवार में कमाने वाला कोई नहीं, और बीमारी ने उसे पूरी तरह निर्बल बना दिया है। वह हर रोज़ अपनी साँसों और बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष कर रही है।

 

जो भी व्यक्ति मानवीय संवेदना के तहत सहायता करना चाहे, वह गुरुवारी की बहन सोमबारी गागराई से संपर्क कर सकता है।

 

संपर्क पता:

बागबेड़ा नया बस्ती रोड नंबर–2, साईं बाड़ी

मोबाइल नंबर: 7004993459

 

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