झारखण्डसरायकेला

मेटाफैब कंपनी के खिलाफ झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का प्रदर्शन, घायल मजदूरों को मुआवज़ा और पुनर्नियोजन की मांग  

 

 

सरायकेला जिले के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित मेटाफैब इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व में हाईको) बुधवार को एक बार फिर श्रमिक आंदोलन का केंद्र बन गया। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं सरायकेला विधानसभा से संभावित प्रत्याशी प्रेम मरडी के नेतृत्व में सैकड़ों मजदूरों ने कंपनी के मुख्य गेट पर प्रदर्शन कर प्रबंधन के खिलाफ नाराज़गी जताई।

 

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कंपनी में कार्यरत श्रमिकों को लंबे समय से न तो सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जा रही है और न ही काम के दौरान घायल हुए मजदूरों को कोई मुआवजा। प्रेम मरडी ने कहा कि लोटा मुर्मू और बासु सरदार जैसे श्रमिकों की उंगलियां कट गईं, लेकिन कंपनी ने उन्हें किसी तरह की राहत नहीं दी। वहीं पंचम मुड़ी को गंभीर चोट के बाद काम से निकाल दिया गया, जबकि सोनू लोहार, जो पिछले 12 वर्षों से कंपनी में कार्यरत था, उसे बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से हटा दिया गया।

प्रेम मरडी ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी में कार्यरत अधिकांश ठेका मजदूरों को ईएसआई और पीएफ जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। इन परिस्थितियों में मजदूर लगातार शोषण का शिकार हो रहे हैं। संगठन की ओर से प्रबंधन को एक मांगपत्र सौंपा गया है, जिसमें घायल श्रमिकों को मुआवज़ा देने, बर्खास्त मजदूरों की वापसी सुनिश्चित करने और ठेका श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है।

 

JLKM नेताओं का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब उन्होंने श्रमिकों की समस्याओं को प्रशासनिक स्तर पर उठाया हो। कई बार श्रम अधीक्षक से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजदूरों में व्याप्त आक्रोश इसी उपेक्षा का परिणाम है, और अब वे मजबूर होकर सड़कों पर उतर आए हैं।

 

आंदोलन के इस दौर ने एक बार फिर आदित्यपुर और गम्हरिया जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक असंतोष की जमीनी हकीकत को उजागर किया है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा लगातार श्रमिकों के मुद्दों को मजबूती से उठा रहा है, और अब यह आंदोलन उद्योग जगत के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभर रहा है। हालांकि उद्योग जगत इस पर सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहा है, लेकिन अंदर ही अंदर इसे एक बढ़ते औद्योगिक संकट के रूप में देखा जा रहा है।

इस दौरान JLKM के नेता प्रेम मरडी ने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ एक संगठन का आंदोलन नहीं, बल्कि मेहनतकश श्रमिकों के सम्मान और हक़ की लड़ाई है। जब तक घायल श्रमिकों को न्याय और ठेका मजदूरों को अधिकार नहीं मिलते, यह संघर्ष जारी रहेगा।

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