मो. बारीक ने बढ़ती ठंड में दिखाई इंसानियत—गरीबों के बीच बाँटे सौ कम्बल
बड़ी बाजार स्थित जामा मस्जिद परिसर में जुम्मे की नमाज़ के बाद समाजसेवी मो. बारीक एक बार फिर अपनी मानवता पूर्ण पहल को लेकर चर्चाओं में रहे। कड़ाके की ठंड में ठिठुरते गरीब, बेसहारा और असहाय लोगों के बीच उन्होंने लगभग सौ कम्बलों का वितरण किया। प्रशासनिक स्तर पर अब तक किसी तरह की ठोस मदद नहीं मिलने से परेशान लोगों के चेहरों पर कम्बल मिलने के बाद राहत की चमक दिखाई दी।


कम्बल वितरण कार्यक्रम के दौरान मो. बारीक ने बताया कि इनमें से कई लोग ऐसे हैं जिनके पास न छत है, न भोजन की व्यवस्था। कुछ शारीरिक रूप से अक्षम हैं, तो कुछ मानसिक रूप से अस्वस्थ। ऐसे संवेदनशील समय में मानवता की सेवा को ही उन्होंने अपना ध्येय बताया।
उन्होंने बातचीत के अंत में भावुक होते हुए कहा—
“न जाने कब मौत का पैगाम आ जाए, जिंदगी का कब आख़िरी शाम आ जाए…
आप भी ऐसा लम्हा तलाशें, कि आपकी ज़िंदगी भी किसी के काम आ जाए।”
मो. बारीक की इस पहल को स्थानीय लोगों ने सराहते हुए कहा कि समाज में ऐसे सेवाभावी लोग ही उम्मीद की नई रोशनी जगाते हैं।

