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पोस्टर विवाद पर भावुक हुए सनद आचार्य, कहा—“गुरुओं का सम्मान राजनीति से ऊपर”  

 

 

सरायकेला: नगर पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सनद आचार्य एक पोस्टर विवाद को लेकर भावुक हो गए। उनके प्रतिद्वंदी द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि स्वर्गीय पिता, चाचा और नगर के अन्य दिवंगत प्रबुद्ध लोगों की तस्वीरों को राजनीति से जोड़ना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

 

बताया जा रहा है कि चुनावी पोस्टर में शामिल दिवंगत व्यक्तियों की तस्वीरों को लेकर प्रतिद्वंदी ने टिप्पणी की थी कि मृत व्यक्तियों की तस्वीरों के सहारे वोट मांगे जा रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सनद आचार्य ने कहा, “वे मेरे गुरुजन, मेरे आदर्श और मेरे हीरो हैं। उनका चित्र सम्मान और प्रेरणा के लिए है, किसी प्रकार की राजनीतिक लाभ के लिए नहीं। ऐसी राजनीति मैं करना नहीं चाहता।”

 

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और सम्मान बनाए रखना जरूरी है। दिवंगत व्यक्तियों को लेकर की गई टिप्पणी से वे आहत हैं, क्योंकि वे सभी उनके जीवन में प्रेरणास्रोत रहे हैं।

 

इस दौरान सनद आचार्य ने अपने प्रतिद्वंदी पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को जनता ने विकास के नाम पर सत्ता सौंपी, उन्होंने अपेक्षाओं पर खरा उतरने के बजाय नगर में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बस स्टैंड परियोजना जैसे कार्यों में कमीशनखोरी कर जनता के पैसे का दुरुपयोग किया गया।

 

सनद आचार्य ने कहा, “जनता ने विकास के लिए पद दिया था, लेकिन कुछ लोगों ने ठेकेदार की भूमिका निभाकर नगर की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। मैं बिना किसी पद के भी निःस्वार्थ भाव से नगर की सेवा करता रहा हूँ और आगे भी करता रहूँगा।”

 

उन्होंने कहा कि सरायकेला की जनता जागरूक है और सही-गलत का फैसला करना जानती है। चुनाव विकास, पारदर्शिता और सम्मान की राजनीति के आधार पर लड़ा जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियों और भावनात्मक मुद्दों पर।

 

नगर की राजनीति में इस बयान के बाद माहौल गर्म हो गया है और आने वाले दिनों में चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

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