पश्चिम सिंहभूम में हाथी का तांडव जारी, पोस्टमार्टम में देरी से ग्रामीणों में आक्रोश
चाईबासा(प्रकाश कुमार गुप्ता): पश्चिम सिंहभूम जिले में बीते 1 तारीख से हाथियों का तांडव लगातार जारी है। इस दौरान जिले के सदर प्रखंड सहित गोइलकेरा, झींकपानी, हाटगम्हरिया, नोवामुंडी आदि प्रखंडों में हाथियों के हमले में अब तक लगभग 17 से 18 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हाथियों के आतंक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।


आज की ताजा घटना हाटगम्हरिया प्रखंड के सियाल जोड़ा गांव से सामने आई है। यहां हाथी के हमले में 47 वर्षीय चिरपी हेंब्रम की मौत हो गई। मृतका के पति का नाम गुमदी हेंब्रम बताया गया है। मृतका का पोस्टमार्टम कराने के लिए परिजन और ग्रामीण चाईबासा सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, लेकिन वहां काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी पोस्टमार्टम नहीं हो सका। इससे परिजन और ग्रामीण काफी परेशान और आक्रोशित नजर आए।
ग्रामीणों का कहना है कि सुबह से ही वे पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद थे, लेकिन लंबे समय तक कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इलाज और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई। इसी दौरान पोस्टमार्टम हाउस परिसर में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
मौके पर समाजसेवी रमेश बालमुचू, सामाजिक कार्यकर्ता रेयांश समड़ और पूर्व मुखिया खुशबू भी पहुंचे। उन्होंने जिला स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाथी के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से न तो समय पर इलाज की व्यवस्था की जा रही है और न ही पीड़ित परिवारों को राहत मिल पा रही है।
इन लोगों ने अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड में हाथी हमले से मृतकों के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि मुआवजा राशि कम होने के कारण पीड़ित परिवारों को पर्याप्त सहायता नहीं मिल पा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मुआवजा राशि बढ़ाई जाए और स्वास्थ्य व वन विभाग मिलकर ठोस कदम उठाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

