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श्रीनाथ विश्वविद्यालय में दुर्गोत्सव 2025 का भव्य आयोजन

 

डांडिया की थाप और भक्ति के सुरों से गूंजा परिसर, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

 

सरायकेला। नवरात्र के पावन अवसर पर श्रीनाथ विश्वविद्यालय का परिसर शनिवार की शाम रंगों, संगीत और भक्ति से सराबोर हो उठा। अवसर था दुर्गोत्सव 2025 के भव्य आयोजन का। पूरे विश्वविद्यालय परिवार ने उत्साह, उमंग और भक्ति भाव के साथ इस उत्सव में भाग लेकर शाम को अविस्मरणीय बना दिया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुआ। विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डा.) एस. एन. सिंह, रजिस्ट्रार डा. मौसुमी महतो, एसोसिएट डीन (एकेडमिक्स) डा. भाव्या भूषण, फार्मेसी कॉलेज के प्राचार्य डा. प्रशांता महापात्रा और स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के प्रमुख श्री शशिकांत सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर आयोजन की शुरुआत की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सुखदेव महतो मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए, जिनकी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। मां दुर्गा पर आधारित संगीतमय नाटक ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया, जबकि छात्रों द्वारा किया गया आकर्षक रैंप वॉक कार्यक्रम का विशेष आकर्षण बना। विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर अंकिता बासु एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीत ने अपनी मधुर आवाज़ से पूरे वातावरण को भक्ति रस से भर दिया।

 

शाम का मुख्य आकर्षण डांडिया नाइट रहा, जिसमें परंपरागत परिधानों में सजे छात्रों ने गरबा और डांडिया की धुनों पर झूमकर उत्सव को जीवंत बना दिया। डांडिया की थाप और रंगीन रोशनी के बीच विश्वविद्यालय का पूरा परिसर नवरात्र की उमंग में डूब गया।

मीडिया से बातचीत के दौरान कुलाधिपति श्री सुखदेव महतो ने दुर्गोत्सव 2025 के सफल आयोजन के लिए पूरी आयोजन टीम को बधाई दी और कहा कि यह कार्यक्रम श्रीनाथ विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक विरासत, एकता और सामूहिक भावना का प्रतीक है। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों को नवरात्र की शुभकामनाएँ दीं और सभी के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

 

भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक यह दुर्गोत्सव कार्यक्रम आशीर्वाद और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन ने न केवल विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक जीवन को समृद्ध किया, बल्कि विश्वविद्यालय परिवार के बीच एकजुटता और सामूहिक सहभागिता की भावना को भी और प्रगाढ़ बनाया।

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