सिविल सर्जन कार्यालय, पूर्वी सिंहभूम में “डायन प्रथा” उन्मूलन पर जागरूकता अभियान
जमशेदपुर, 27 फरवरी 2026। जिला स्वास्थ्य समिति, पूर्वी सिंहभूम के तत्वावधान में सिविल सर्जन कार्यालय स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम कॉन्फ्रेंस हॉल में शुक्रवार को “डायन प्रथा” के खिलाफ जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के निर्देश पर संपन्न हुआ, जिसमें विभिन्न प्रखंडों से आए बहुउद्देश्यीय कार्यकर्ता (एमपीडब्ल्यू) शामिल हुए।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कहा कि डायन प्रथा एक गंभीर सामाजिक कुरीति और हिंसा का रूप है। यह अंधविश्वास, अशिक्षा और ओझा-तांत्रिकों पर निर्भरता के कारण विशेष रूप से ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं के उत्पीड़न का माध्यम बनती है। उन्होंने बताया कि झारखंड में वर्ष 2001 से इस कुप्रथा के विरुद्ध कड़ा कानून लागू है, जिसके तहत दोषियों के लिए कठोर दंड और जुर्माने का प्रावधान है। बावजूद इसके, सामाजिक जागरूकता और वैज्ञानिक सोच का प्रसार अत्यंत आवश्यक है।
जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव लोचन महतो ने कहा कि प्राचीन मान्यताओं के आधार पर महिलाओं—विशेषकर विधवाओं और अकेली महिलाओं—को संपत्ति विवाद, पारिवारिक झगड़े या व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण “डायन” करार देकर प्रताड़ित किया जाता है। स्थानीय परंपराओं में जादू-टोना संबंधी विश्वासों के कारण ओझाओं द्वारा किसी को चिन्हित करना सामाजिक हिंसा को बढ़ावा देता है। उन्होंने आह्वान किया कि समाज को मिलकर भ्रांतियों को दूर करना होगा और पीड़ित महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ना होगा।
कार्यक्रम में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. कमलेश कुमार प्रसाद, डीईआईसी की सोशल वर्कर नमृता ठाकुर सहित सभी प्रखंडों के एमपीडब्ल्यू उपस्थित रहे। उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों ने डायन प्रथा उन्मूलन के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।

