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सरायकेला-खरसावां जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त किया सम्मान, जनजातीय विकास में मॉडल स्थापित

सरायकेला-खरसावां जिले ने भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के “धरती आबा जनभागीदारी अभियान” में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देशभर में अपनी पहचान बनाई है। इस उपलब्धि के लिए शनिवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपायुक्त नितिश कुमार सिंह को सम्मानित किया। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव भी उपस्थित थे।

 

जिले में इस अभियान के तहत जनजातीय सशक्तिकरण, सामुदायिक भागीदारी और नवाचारी प्रशासनिक पहलों को सफलतापूर्वक लागू किया गया। प्रशासन ने विकास योजनाओं के 100% सैचुरेशन का लक्ष्य रखा और सड़क, आवास, शिक्षा, पोषण, पेयजल और आजीविका जैसे क्षेत्रों में प्रगति सुनिश्चित की। अब तक 199 डिजिटल लर्निंग सेंटर और वनाधिकार कानून के तहत 311 गांवों में विभागीय कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

 

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी जिले ने बड़ा बदलाव किया है। 1421 विद्यालय और 1373 आंगनबाड़ी केंद्र जनजातीय बच्चों की सेवा में सक्रिय हैं। कौशल विकास योजनाओं के तहत 5793 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया, जबकि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 14 पीएचसी और 8 सीएचसी काम कर रहे हैं।

 

सीमित संसाधनों के बावजूद सरायकेला-खरसावां ने जनभागीदारी और नवाचार के जरिए विकास का मजबूत मॉडल तैयार किया, जो राष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय माना जा रहा है।

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