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सरना स्थल से पेसा आंदोलन को धार, चंपाई सोरेन बोले– ग्राम सभा की अनदेखी बर्दाश्त नहीं

सरायकेला से पेसा नियमों को लेकर आदिवासी-मूलवासी अधिकारों की आवाज़ तेज होती नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने हाल ही में अधिसूचित पेसा नियमों पर सवाल खड़े करते हुए राज्य सरकार पर आदिवासी समाज को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन गांवों में रहने वाले लोगों को उनके संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए है।

गम्हरिया स्थित सरना उमूल जाहेरस्थान में कालिकापुर के मांझी बाबा, नायके बाबा और समाज के लोगों के साथ बैठक कर चंपाई सोरेन ने कहा कि आदिवासी जिन जमीनों पर पीढ़ियों से रह रहे हैं, वे उनकी पुस्तैनी जमीनें हैं। इन जमीनों पर औद्योगिक परियोजनाएं खड़ी कर दी गईं, लेकिन ग्राम सभा की सहमति और समाज के हितों को नजरअंदाज किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर कभी डैम, कभी फैक्ट्री बनाकर आदिवासी समाज को विस्थापित किया जा रहा है। चांडिल डैम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सैकड़ों गांव डूब गए, लेकिन आज भी विस्थापितों को न्याय नहीं मिला।

चंपाई सोरेन ने साफ कहा कि आदिवासी समाज विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन वह ऐसा विकास चाहता है जिसमें जमीन देने वाले परिवारों की भागीदारी और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने पेसा और ग्राम सभा के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन को और तेज करने का आह्वान

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