विज्ञान नेतृत्व में महिलाएँ: सतत विकास का नया अध्याय
हर वर्ष 11 फरवरी को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस, जिसे यूनेस्को के नेतृत्व में आयोजित किया जाता है, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को आगे बढ़ाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। वैश्विक स्तर पर महिलाएँ अब लगभग एक-तिहाई शोधकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं और स्वास्थ्य सेवा, इंजीनियरिंग, अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर औद्योगिक अनुसंधान तक विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान दे रही हैं। यह दिवस सतत विकास और दीर्घकालिक नवाचार के लिए STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) में समावेशी भागीदारी के महत्व को भी सुदृढ़ करता है।


टाटा स्टील में यह विश्वास लंबे समय से लागू नीतियों और ज़मीनी स्तर की पहल में दिखाई देता है, जो महिलाओं को उनके करियर के हर चरण में तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समर्थन प्रदान करती हैं। कंपनी के मोजैक, विविधता, समानता और समावेशन फ्रेमवर्क पर आधारित यह प्रयास ऐसे सक्षम तंत्र विकसित करने पर केंद्रित है, जो भागीदारी, निरंतरता और क्षमता को मजबूत बनाते हैं—जो एक सशक्त और भविष्य के लिए तैयार संगठन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
नीतियों से आगे बढ़ते हुए, टाटा स्टील ने परंपरागत रूप से महिलाओं की कार्यभागीदारी से बाहर माने जाने वाले क्षेत्रों, विशेषकर विज्ञान और इंजीनियरिंग आधारित मुख्य परिचालन भूमिकाओं में, महिलाओं की भागीदारी को निरंतर बढ़ाया है। वूमेन @माइंस जैसी पहल के माध्यम से कंपनी ने खनन क्षेत्र में परिचालन, तकनीकी और नेतृत्व भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी की नई राह बनाई है। इस पहल ने मुख्य औद्योगिक परिवेश में अवसरों का विस्तार किया है और महिलाओं को आगे बढ़ने तथा सफल होने के लिए मजबूत मंच प्रदान किया है।
तेजस्विनी और तेजस्विनी 2.0 के माध्यम से महिलाओं को खनन परिचालन में हेवी अर्थ-मूविंग मशीनरी ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षित और तैनात किया गया है। वे अब जटिल, तकनीक-आधारित प्रक्रियाओं को संभाल रही हैं, जो कुशल और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वर्ष 2024 में टाटा स्टील ने नोआमुंडी में भारत की पहली ऑल वूमेन माइनिंग शिफ्ट शुरू की, जहां अब महिलाएँ रात की पाली सहित तीनों शिफ्टों में महत्वपूर्ण परिचालन प्रक्रियाओं का संचालन कर रही हैं। तीन-शिफ्ट तैनाती के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश, मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल, उपयुक्त अवसंरचना और संवेदनशील नेतृत्व के सहयोग से यह सुनिश्चित किया गया है कि महिलाएँ सभी कार्यक्षेत्रों में आत्मविश्वास और सुरक्षा के साथ काम कर सकें। यह औद्योगिक परिचालन में समावेशन का एक नया मानदंड स्थापित करता है।
टाटा स्टील का STEM क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण मजबूत नेतृत्व और प्रतिभा के अवसरों के निर्माण पर भी केंद्रित है। वूमेन ऑफ मेटल कार्यक्रम, जो प्रारंभिक करियर की महिला इंजीनियरों के लिए कंपनी की प्रमुख पहल है, प्रतिष्ठित संस्थानों से आई प्रतिभाओं को वास्तविक परियोजनाओं, संरचित मेंटरशिप और उद्योग में अनुभव के माध्यम से विकसित करता है। इसके साथ ही, क्रुसीबोल्ट और ब्रेक थ्रू सीरीज जैसी नेतृत्व विकास पहलों के जरिए रणनीतिक सोच, नेतृत्व क्षमता और क्रॉस-फंक्शनल सहयोग को सशक्त बनाया जाता है, जिससे महिला पेशेवरों को महत्वपूर्ण और भविष्य के लिए तैयार भूमिकाओं के लिए तैयार किया जाता है।
समावेशन और क्षमता निर्माण पर यह सतत ध्यान वैश्विक स्तर पर मिली मान्यता में भी परिलक्षित होता है। टाटा स्टील की महिला पेशेवर अंजना तिवारी और बंदी गायत्री को वूमेन इन माइनिंग यूके द्वारा जारी 100 ग्लोबल इंस्पिरेशनल वुमन इन माइनिंग की सूची में शामिल किया गया, जो द्विवार्षिक रूप से खनन क्षेत्र में विश्व स्तर पर प्रभाव और परिवर्तन लाने वाली महिलाओं को सम्मानित करती है। उनका चयन इस बात को रेखांकित करता है कि टाटा स्टील तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण और परंपरागत रूप से पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में महिलाओं को नेतृत्व, प्रभाव और उत्कृष्ट परिणाम देने के अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
वर्तमान में टाटा स्टील भारत भर में तकनीकी तथा अन्य STEM केंद्रित भूमिकाओं में लगभग 1,000 महिलाओं को रोजगार प्रदान कर रही है, जो इन क्षेत्रों में लैंगिक प्रतिनिधित्व को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस के अवसर पर यह संकल्प और अधिक स्पष्ट हो जाता है। निरंतर प्रगति ऐसे सक्षम तंत्र, सहयोगी नीतियों और प्रेरक रोल मॉडल्स पर निर्भर करेगी, जो महिलाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के हर क्षेत्र में पूर्ण भागीदारी और श्रेष्ठ प्रदर्शन का अवसर प्रदान करें।
समावेशन को नवाचार से जोड़ते हुए, टाटा स्टील STEM क्षेत्रों में लैंगिक समानता को सतत विकास, जिम्मेदार औद्योगिक प्रगति और दीर्घकालिक मूल्य सृजन का एक महत्वपूर्ण आधार मानते हुए निरंतर आगे बढ़ रही है।

