विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2025 पर श्रीनाथ विश्वविद्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर श्रीनाथ विश्वविद्यालय, जमशेदपुर में मेंटल हेल्थ क्लब एवं योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा विभाग के तत्वावधान में “सेवाओं तक पहुँच: आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा आपदाओं और आपातकालीन परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के महत्व को रेखांकित करना था।


कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के आयुर्वेद संकाय की विकृति विज्ञान विभाग की विशेषज्ञ सुश्री दिव्या सिंह आमंत्रित थीं। उन्होंने अपने प्रेरक व्याख्यान में कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, महामारी, युद्ध या किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य सबसे अधिक प्रभावित होता है। ऐसे समय में समाज को मानसिक रूप से सशक्त और सजग रहना आवश्यक है, क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुँच ही स्थायी सामाजिक स्वास्थ्य का आधार है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद और योग दोनों मानसिक संतुलन बनाए रखने के प्रभावी उपाय हैं। ध्यान, प्राणायाम और सकारात्मक चिंतन के अभ्यास से व्यक्ति मानसिक रूप से अधिक स्थिर और स्वस्थ रह सकता है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय एवं कुलसचिव महोदया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कुलसचिव महोदया ने अपने संबोधन में कहा कि मन की एकाग्रता और अनुशासन जीवन की सफलता की कुंजी है। ध्यानाभ्यास और आत्मनियंत्रण के माध्यम से व्यक्ति मानसिक रूप से सुदृढ़ बन सकता है। कुलपति महोदय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि योग केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि एक जीवन शैली है। प्रत्येक विद्यार्थी को प्रतिदिन कम से कम 45 मिनट योगाभ्यास का संकल्प लेना चाहिए ताकि वह शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से संतुलित रह सके।
कार्यक्रम की शुरुआत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग की विभागाध्यक्षा के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद मेंटल हेल्थ क्लब की टीम ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की और प्रतिभागियों को कार्यक्रम के उद्देश्य से अवगत कराया। मुख्य वक्ता ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों, नीतिगत उपायों और संकट की परिस्थितियों में सेवा-सुलभता पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।
कार्यक्रम के अंत में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग के विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य में सहायक योगासन, ध्यान, प्राणायाम और सुखात्मक भावनाओं के प्रदर्शन के माध्यम से यह दर्शाया कि योग मानसिक संतुलन बनाए रखने में कितना सहायक है। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सक्रिय रूप से अपने विचार साझा किए तथा प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लेकर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
यह कार्यशाला अत्यंत सफल और प्रभावशाली सिद्ध हुई। प्रतिभागियों ने माना कि ऐसे कार्यक्रम समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और संवेदनशीलता विकसित करने में अत्यंत सहायक होते हैं। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि संकट के समय मानसिक सुदृढ़ता ही व्यक्ति, परिवार और समाज को संतुलित बनाए रखने की सबसे बड़ी शक्ति है। कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन, मेंटल हेल्थ क्लब तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग के इस सार्थक प्रयास की सराहना की। इस अवसर पर फॉर्मेसी विभाग का विशेष योगदान रहा, जिसमें विभाग के शिक्षक और छात्र सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।

