वन विभाग का विरोधाभास: ‘रन फॉर गजराज’ कार्यक्रम में पर्यावरण और वन्य जीवों पर गंभीर खतरा, सरकारी धन की उड़ रही लूट”
चांडिल, 04 अक्टूबर : दलमा हाथी अभयारण्य में रविवार को आयोजित होने जा रहे ‘रन फॉर गजराज’ मैराथन ने वन विभाग की दोहरी नीति उजागर कर दी है। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, एक ओर तो लोगों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खुद ही पर्यावरण और वन्य जीवों के अस्तित्व को गंभीर खतरे में डाल रहा है।


16 किलोमीटर की इस मैराथन के लिए शहरबेड़ा फुटबॉल मैदान से प्रारंभ होकर दलमा इको-सेंसिटिव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर फ्लेक्स लगाए गए हैं। दलमा ग्राम सभा सुरक्षा मंच के सुकलाल पहाडिया का कहना है कि यह कदम न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि सरकारी धन की बर्बादी और लूट का स्पष्ट उदाहरण है।
फ्लेक्स में उपयोग किए गए प्लास्टिक और रसायन मिट्टी, जल और हवा को प्रदूषित करते हैं। यदि इन्हें जलाया गया तो हानिकारक गैसें निकलती हैं, और जंगली जानवरों द्वारा गलती से खा लिए जाने पर घुटन, विषाक्तता या पाचन संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
सुकलाल पहाडिया ने कहा, “वन विभाग के अधिकारी एक दिन के कार्यक्रम के लिए इतनी महंगी और नुकसानदेह सामग्री क्यों बनवा रहे हैं। फ्लेक्स की जगह कपड़े के बैनर, पेंटिंग या कागज से प्रचार किया जा सकता था। यह न सिर्फ पर्यावरण के प्रति गंभीर उपेक्षा है, बल्कि सरकारी धन की सीधे लूट भी है।”
स्थानीय पर्यावरणविदों का कहना है कि इस तरह के प्रचार माध्यम वन्यजीव और इको-सेंसिटिव क्षेत्र के लिए खतरा हैं। वन विभाग को तत्काल इस पर रोक लगाकर अधिक टिकाऊ और सुरक्षित विकल्प अपनाने की जरूरत है।
इस कार्यक्रम के बहाने खर्च किए जा रहे लाखों रुपये और पर्यावरणीय हानि ने वन विभाग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


