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3.5 करोड़ के मॉडर्न जाहेरथान में भ्रष्टाचार पर एक महीना बीता, फिर भी कार्रवाई नहीं — अब फूटेगा ग्रामीणों का गुस्सा!

सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत गेंगेरुली पंचायत के टूईबासा गांव में 3.5 करोड़ रुपये की लागत से बने मॉडर्न जाहेरथान में भ्रष्टाचार और भारी अनियमितताओं की खबर सामने आए आज लगभग एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है। न जांच हुई, न दोषियों पर कोई कदम उठाया गया और न ही निर्माण कार्य की खामियों को दूर किया गया। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

 

ग्रामीणों ने पहले ही मीडिया के माध्यम से निर्माण कार्य की पोल खोल दी थी। उन्होंने बताया था कि जाहेरथान परिसर में जगह-जगह दरारें पड़ चुकी हैं, छत से पानी टपक रहा है, दरवाजे घटिया गुणवत्ता के हैं, पानी की मोटर खराब पड़ी है, गार्डन अधूरा है, गेस्ट रूम की स्थिति खराब है और निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये की बंदरबांट हुई है।

 

इतने गंभीर आरोपों के बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर 3.5 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी निर्माण कार्य की ऐसी बदहाल स्थिति कैसे हुई? किसकी मिलीभगत से घटिया निर्माण कराया गया? और जब ग्रामीणों ने शिकायत की, मीडिया में खबर चली, DC को ज्ञापन दिया गया, तो फिर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

 

ग्रामीणों का कहना है कि सांसद से लेकर जिला प्रशासन तक सबको जानकारी दी गई, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। एक महीना बीत गया, मगर न कोई अधिकारी जांच करने पहुंचा और न ही जिम्मेदार ठेकेदार पर कोई कार्रवाई हुई। इससे साफ लगता है कि भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश हो रही है।

 

अब टूईबासा के ग्रामीणों का सब्र टूट चुका है। उनका कहना है कि अगर जल्द जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और निर्माण कार्य में सुधार नहीं कराया गया, तो वे DC कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना प्रदर्शन करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आदिवासी आस्था और संस्कृति से जुड़े इतने महत्वपूर्ण स्थल के निर्माण में भी भ्रष्टाचार हो सकता है, तो फिर विकास योजनाओं की पारदर्शिता पर कैसे भरोसा किया जाए? जाहेरथान केवल एक भवन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र है। अगर यहां भी भ्रष्टाचार होगा और प्रशासन मौन रहेगा, तो यह केवल सरकारी लापरवाही नहीं बल्कि आदिवासी समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।

 

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कब जागता है। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर 3.5 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले को फाइलों में दबा दिया जाएगा? टूईबासा के ग्रामीण जवाब मांग रहे हैं और अगर जल्द जवाब नहीं मिला, तो आंदोलन तय है।

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