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राजनगर सीएचसी में जच्चा-बच्चा मौत पर फूटा सहियाओं का गुस्सा, चेतावनी— “व्यवस्था नहीं सुधरी तो गर्भवतियों को अस्पताल नहीं लाएंगे

 

राजनगर: राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। अब इस मामले में प्रखंड की स्वास्थ्य सहियाओं ने भी मोर्चा खोल दिया है। विभिन्न पंचायतों से पहुंची सहियाओं ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द अस्पताल की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वे गर्भवती महिलाओं को राजनगर सीएचसी लाना बंद कर देंगी।

सहियाओं ने कहा कि वे गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाने का काम करती हैं, लेकिन सीएचसी में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, संसाधनों की कमी और समय पर इलाज नहीं मिलने से लगातार परेशानी हो रही है। हालिया जच्चा-बच्चा मौत की घटना ने पूरे क्षेत्र की सहियाओं को झकझोर कर रख दिया है।

आंदोलनरत सहियाओं ने आरोप लगाया कि अस्पताल में कई बार डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी समय पर मौजूद नहीं रहते, जिससे मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्रसव के दौरान जरूरी सुविधाओं की कमी तथा रेफर प्रक्रिया में देरी को भी उन्होंने गंभीर समस्या बताया।

सहियाओं ने घटना में जिम्मेदार डॉक्टरों और नर्सों पर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जिनकी लापरवाही की वजह से सहिया बिनीता बानरा की मौत हुई, उन सभी पर तत्काल कानूनी कार्रवाई और निलंबन होना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सीएचसी में सीजर ऑपरेशन के नाम पर गर्भवती महिलाओं के परिजनों से अवैध वसूली की जाती है, जिसे तत्काल बंद किया जाए।

इस दौरान सहियाओं ने राजनगर सीएचसी के पूर्व प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अर्जुन सोरेन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि उनके कार्यकाल में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी और स्वास्थ्यकर्मियों की मनमानी बढ़ गई थी। सहियाओं ने आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष के दौरान अस्पताल में बिजली, संसाधन और प्रसव व्यवस्था को लेकर कोई ठोस सुधार नहीं हुआ तथा पैसों की उगाही जैसी शिकायतों पर भी रोक नहीं लग सकी। इसलिए पूर्व प्रभारी डॉ. अर्जुन सोरेन को भी निलंबित करने की मांग उठाई गई।

सहियाओं ने साफ कहा कि जब तक संबंधित स्वास्थ्य पदाधिकारियों, डॉक्टरों और नर्सों पर कार्रवाई नहीं होती तथा अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, पर्याप्त डॉक्टर, दवा और जिम्मेदार व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगी। उन्होंने दो टूक कहा कि “जब स्वास्थ्य सहिया ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित होंगे।”

सहियाओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि स्थिति में सुधार होने तक प्रखंड की कोई भी सहिया गर्भवती महिलाओं को राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं लाएगी। मामले को लेकर क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं और लोगों में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है।

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