सरायकेला:- अपनी बीएड की पढ़ाई वर्ष 2015 में पूरी कर अपने-अपने रास्तों पर निकले दोस्तों का समूह आज लगभग 10 वर्षों के बाद एक बार फिर एक साथ मिले। जिससे पुरानी यादें फिर से ताजा हो उठी, तो वहीं अपने वर्तमान जीवन और भविष्य की योजनाओं को लेकर भी मंथन किया।
शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े प्रदीप कुमार महतो ने अपने विचार रखते हुए कहा कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं होता बल्कि समाज को सही दिशा देकर उनमें अच्छे संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास पैदा करना होता है।
वहीं शिक्षक सुमन कुमार पाल ने कहां की दोस्तों से मिलना किसी उत्सव से कम नहीं है। आज हम सभी अपने-अपने कार्यों में व्यस्त हैं लेकिन छात्र जीवन की यादें आज भी दिल में जीवित है। श्री पाल ने कहां की हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि तब होगी जब हम समाज और शिक्षा को एक साथ लेकर चल पाए।
तापस कुमार गोराई, जो शिक्षा के साथ-साथ संगीत के क्षेत्र में भी सक्रिय है, उन्होंने कहा कि संगीत और शिक्षा दोनों ही समाज को जोड़े रखने का कार्य करती है। शिक्षा ज्ञान देती है तो संगीत मन को शांति देता है। मेरा प्रयास होगा कि बच्चों और युवाओं को शिक्षा के साथ, कला और संस्कृति से भी जोड़ा जाए।
वहीं शिक्षा से जुड़े अभय शंकर पातर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उन्हें नैतिक, सामाजिक और व्यावसायिक शिक्षा भी दी जाए।
शिक्षक विप्लव बरन बेरा ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी दोस्ती होती है। सच्चे दोस्त का साथ हमें ऊर्जा और प्रेरणा देने का कार्य करती है।
वर्तमान में आसनबनी इंटर कॉलेज में कार्यरत शिक्षक अमित कुमार दे ने कहा कि शिक्षक का जीवन केवल विद्यालय तक सीमित नहीं होता बल्कि समाज के हर वर्ग तक उसकी जिम्मेदारी होती है। विद्यार्थियों के अंदर अनुशासन, सकारात्मक सोच और मेहनत की भावना विकसित करना ही शिक्षक का सबसे बड़ा कर्तव्य है।
इस दौरान सभी मित्रों ने अपने छात्र जीवन के दिनों को याद करते हुए हंसी-मजाक, पुरानी तस्वीरें और यादगार घटनाओं को साझा किया। साथ ही सभी अपने-अपने क्षेत्र में रहकर समाज को बेहतर बनाने का संकल्प भी लिया।