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धर्मांतरण और आदिवासी आरक्षण पर फिर मुखर हुए चंपई सोरेन, हाईकोर्ट याचिका का किया जिक्र

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री Champai Soren ने एक बार फिर धर्मांतरण, आदिवासी पहचान और आरक्षण के मुद्दे को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए झारखंड हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका का उल्लेख किया, जिसमें एक मंत्री के जाति प्रमाण पत्र को चुनौती दी गई है।

 

पोस्ट में दावा किया गया है कि संबंधित जाति प्रमाण पत्र के एफिडेविट में धर्म के स्थान पर “ईसाई” दर्ज है। इसके आधार पर सवाल उठाया गया कि जब ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं मानी जाती, तब अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र कैसे जारी किया गया। पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का भी हवाला दिया गया, जिनमें धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सख्त रुख सामने आया था।

 

चंपई सोरेन ने अपनी पोस्ट में आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति, सरना धर्म, जाहेरस्थान, देशाउली और रीति-रिवाजों के संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने लिखा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग पहचान, पूजा पद्धति और जीवनशैली है, जिसे बचाए रखना जरूरी है।

 

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि धर्मांतरण के बाद आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नीति बननी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने और आवश्यक संवैधानिक संशोधन पर विचार करने की मांग की।

 

गौरतलब है कि Champai Soren लंबे समय से इस विषय को सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहे हैं। वे कई बार आदिवासी पहचान, धर्मांतरण और “डीलिस्टिंग” जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रख चुके हैं।

 

फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम फैसला अदालत द्वारा प्रस्तुत तथ्यों एवं कानूनी दलीलों के आधार पर लिया जाएगा।

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