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झारखंड राज्यसभा चुनाव: बैजनाथ राम और परिमल नाथवानी विजयी, क्रॉस वोटिंग और अमान्य मतों ने बढ़ाई सियासी हलचल

रांची: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। परिणाम सामने आने के बाद क्रॉस वोटिंग और अमान्य मतों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

चुनाव में कुल 81 विधायकों को मतदान करना था, लेकिन तीन मत अमान्य घोषित कर दिए गए। शेष 78 वैध मतों में बैजनाथ राम को 31 वोट मिले, जबकि परिमल नाथवानी के पक्ष में 28 विधायक खड़े नजर आए। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को मात्र 19 वोट प्राप्त हुए। आंकड़ों ने इसलिए भी सबको चौंकाया क्योंकि सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत होने का दावा किया जा रहा था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम यह संकेत दे रहे हैं कि कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया है। चुनाव से पहले सत्ताधारी गठबंधन की ओर से एकजुटता का प्रदर्शन किया गया था और दोनों उम्मीदवारों को समर्थन देने की बात कही गई थी, लेकिन नतीजे कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार अमान्य घोषित तीन मतों में दो वोट एनडीए खेमे और एक वोट कांग्रेस से जुड़े विधायक का बताया जा रहा है। हालांकि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों में इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस विधायक दल पूरी तरह एकजुट था। इसके बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि यदि कांग्रेस और सहयोगी दलों के सभी विधायक एकमत थे, तो फिर वोटों का गणित कैसे बदला।

कांग्रेस विधायक रमा खलखो ने भी परिणाम के बाद क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि मामले की समीक्षा की जाएगी और यदि किसी विधायक द्वारा पार्टी के निर्देशों की अनदेखी किए जाने की पुष्टि होती है तो इसकी जानकारी शीर्ष नेतृत्व को भेजी जाएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने पर्दे के पीछे ऐसी परिस्थितियां बनाई, जिससे क्रॉस वोटिंग को बढ़ावा मिला।

दूसरी ओर भाजपा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की अनुपस्थिति में पार्टी नेताओं ने कहा कि जीत संगठन की रणनीति और समर्थन के आधार पर मिली है, न कि किसी प्रकार के लेन-देन के कारण। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष हार के बाद बेबुनियाद आरोप लगा रहा है।

इस चुनाव की एक और खास बात यह रही कि परिमल नाथवानी लगातार तीसरी बार झारखंड से राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे हैं। इससे पहले भी वे राज्यसभा में झारखंड का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनकी जीत को एनडीए के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।

राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने फिलहाल झारखंड की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वे वोट किस ओर गए, जिन्होंने चुनावी समीकरण बदल दिए। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की अंदरूनी समीक्षा और संभावित कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

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