घर टूटा, लेकिन हौसला नहीं… मलबे में दबी मेधावी छात्रा लक्ष्मी मुंडा के सपनों की दर्दभरी कहानी

रांची: राजधानी रांची में नगर निगम की कार्रवाई के बाद एक मेधावी छात्रा का भविष्य अनिश्चितता के साये में आ गया है। उर्सलाइन स्कूल की दसवीं कक्षा की छात्रा लक्ष्मी मुंडा जब रोज़ की तरह स्कूल से घर लौटी, तो उसके सामने ऐसा दृश्य था जिसने उसकी पूरी दुनिया बदल दी।


जिस घर में वह अपने परिवार के साथ रहती थी और जहां से परिवार की आजीविका चलाने वाली छोटी दुकान संचालित होती थी, वह नगर निगम की कार्रवाई में ध्वस्त हो चुकी थी। मौके पर सिर्फ मलबा, टूटी दीवारें और बिखरा सामान बचा था। लगातार हो रही बारिश के कारण परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गया है।
मलबे के बीच लक्ष्मी अपनी भीगी हुई किताबें और कॉपियां समेटती नजर आई। वैज्ञानिक बनने का सपना देखने वाली इस छात्रा की सबसे बड़ी चिंता अब अपनी पढ़ाई को जारी रखने की है। उसका कहना है कि जब सिर पर छत ही नहीं रही, तो पढ़ाई कैसे होगी और उसके सपने कैसे पूरे होंगे।
लक्ष्मी की मां सरिता मुंडा ने बताया कि उनका परिवार वर्षों से वहीं रह रहा था। उनकी मां भी उसी स्थान पर रहती थीं और लक्ष्मी का जन्म भी वहीं हुआ था। घर और दुकान दोनों टूट जाने से परिवार के सामने रहने और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
फिलहाल परिवार के पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर इस परिवार के सामने बच्चों की सुरक्षा, भोजन और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें भी चुनौती बन गई हैं।
यह घटना केवल एक मकान के ध्वस्तीकरण की नहीं, बल्कि एक मेधावी छात्रा के संघर्ष, उसके सपनों और एक परिवार की उम्मीदों के बिखर जाने की कहानी बन गई है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन और समाज मिलकर लक्ष्मी की शिक्षा और उसके परिवार के पुनर्वास के लिए आगे आएंगे।

