कांड्रा स्टील प्लांट में मजदूर नेता पर जानलेवा हमला, FIR दर्ज कराने को दिया आवेदन — CCTV में कैद हुई पूरी घटना
कांड्रा/सरायकेला-खरसावां, 28 नवंबर 2025।


कांड्रा स्थित M/S Amalgam Steel & Power Limited में मुआवजा को लेकर चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन के बीच एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है। जोहार झारखंड श्रमिक महासंघ के महामंत्री राजीव कुमार पाण्डेय ने कांड्रा थाना प्रभारी को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि 27 नवंबर की रात कंपनी के ही कुछ वरीय अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों ने उन पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला किया। इस घटना में राजीव गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके सिर में कुल 7 टांके लगने की बात कही गई है।
आंदोलन के दौरान दिया गया मुआवजा
मामला मूलतः मृतक मजदूर मनीष कुमार बाजपेई के परिजनों को उचित मुआवजा दिलाने को लेकर था। दोपहर 3 बजे से आंदोलन जारी था, जिसके बाद कंपनी एवं संवेदक की ओर से परिवार को ₹6 लाख का चेक भी सौंपा गया।
रात 10:35 बजे अचानक हमला — FIR आवेदन में गंभीर आरोप
आवेदन के अनुसार, रात 10:35 बजे कंपनी परिसर के अंदर से कुछ लोग बाहर आए और राजीव पर हमला कर दिया। जिन व्यक्तियों पर हमला करने का आरोप लगाया गया है, वे हैं—
1. आर.एन. प्रसाद, वरीय महाप्रबंधक
2. तारकनाथ तिवारी, सिक्योरिटी हेड
3. तेजपाल सिंह, HR हेड
4. बप्पा पात्रो
5. अन्य 4–5 अज्ञात व्यक्ति
राजीव का दावा है कि इन सभी ने मिलकर लाठी-डंडों से हमला किया, जिससे उनका सिर फट गया और वह गिरकर बेहोश हो गए। उन्होंने यह भी कहा कि घटना कंपनी के CCTV कैमरों में साफ तौर पर कैद है।
“कंपनी मालिक के खिलाफ आवाज उठाओगे तो मार दिए जाओगे”— धमकी का आरोप
राजीव ने यह भी कहा है कि हमलावरों ने वहां मौजूद मजदूरों को चेतावनी दी कि यदि किसी ने कंपनी मालिक सौरभ मिश्रा के खिलाफ आवाज उठाई तो उसका भी यही हाल होगा।
मौके पर मौजूद पुलिस पर भी सवाल
आवेदन में यह आरोप भी लगाया गया है कि घटना के दौरान लगभग 15–20 पुलिसकर्मी साइट पर मौजूद थे। लेकिन अधिकांश पुलिसकर्मी “मूकदर्शक” बने रहे और कार्रवाई की पहल नहीं की।
डायल 112 पर शिकायत के बाद निरीक्षक राजू कुमार बाहर आए और राजीव को CHC गम्हरिया भेजा, जहाँ एनेस्थीसिया न होने के कारण केवल 2 टांके लगाए गए। बाद में उनका पूरा इलाज सदर अस्पताल, खासमहल में किया गया।
घायल नेता अभी भी इलाजरत
राजीव ने अपने आवेदन के साथ चिकित्सीय दस्तावेज भी संलग्न किए हैं और निष्पक्ष जांच व कार्रवाई की मांग की है। वर्तमान में वे इलाजरत हैं।
घटना गंभीर है और श्रमिक संगठन इसे “यूनियन दबाने की कोशिश” बता रहे हैं, जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार मामला बढ़ने के बाद पुलिस और प्रशासन पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि पुलिस इस पूरे मामले में क्या कदम उठाती है और CCTV फुटेज की जांच में क्या सच सामने आता है।


