राजनगर में उबाल: मुआवजे की मांग पर सड़क पर अंतिम संस्कार की तैयारी, प्रशासन पर उठे सवाल

सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर में प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ लोगों का गुस्सा अब चरम पर पहुंच गया है। हाता-चाईबासा मुख्य मार्ग पर ऐसा दृश्य बन गया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है।


राजनगर प्रखंड के गामदेसाई निवासी प्रसिद्ध पशुपालक और अनुभवी पशु चिकित्सक रातू हांसदा की सड़क हादसे में गंभीर चोट लगने के बाद रांची रिम्स में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन जब मृतक परिवार को न्याय और मुआवजा नहीं मिला तो ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा।
गुरुवार शाम से सिद्धो-कान्हू चौक पर शव रखकर चक्का जाम कर रहे ग्रामीण अब हाता-चाईबासा मुख्य मार्ग पर ही लकड़ियां जमा कर अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए हैं। यह दृश्य न सिर्फ बेहद संवेदनशील है बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की भयावह तस्वीर भी पेश कर रहा है।
ग्रामीण मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग पर अड़े हुए हैं। कई दौर की वार्ता के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला तो लोगों का सब्र टूट गया। अब प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द फैसला नहीं हुआ तो सड़क पर ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।
अगर ऐसा होता है तो यह जिला प्रशासन के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति होगी। सवाल यह है कि आखिर प्रशासन किस बात का इंतजार कर रहा है? क्या एक मृतक परिवार को न्याय दिलाने के लिए लोगों को सड़क पर अंतिम संस्कार की चेतावनी देनी पड़ेगी?
राजनगर में स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। हाता-चाईबासा मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लगी है, बाजार बंद है और जनजीवन प्रभावित हो गया है। अब पूरा क्षेत्र प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।
यह सिर्फ मुआवजे की मांग नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता के खिलाफ जनता के फूटते गुस्से की तस्वीर है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह घटना प्रशासन के लिए एक काला अध्याय बन सकती है।

