राज्यपाल से मिले सिरिंगसिया घाटी शहीद स्मारक समिति के सदस्य, शहीद दिवस कार्यक्रम रोकने का लगाया आरोप
चाईबासा(प्रकाश कुमार गुप्ता): सिरिंगसिया घाटी शहीद स्मारक समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर जिला प्रशासन पर शहीद दिवस कार्यक्रम को रोकने की साजिश का आरोप लगाया है। समिति ने राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।


राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में समिति के अध्यक्ष महेन्द्र लागूरी ने बताया कि बीते 45 वर्षों से उनकी संस्था वीर पोटो हो सहित कोल विद्रोह के अन्य महानायकों की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 2 फरवरी को शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित करती आ रही है। इस आयोजन में हजारों लोग शामिल होते हैं तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी सिरिंगसिया घाटी स्थित शहीद स्थल पर शहीद दिवस कार्यक्रम की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ग्रामीणों की सहमति से पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है, लेकिन मंत्री दीपक बिरुआ के दबाव में जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम को रद्द कराने या मुख्य अतिथि को आने से रोकने का दबाव बनाया जा रहा है।
समिति के सदस्यों ने कहा कि दशकों से यह आयोजन शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और निर्विवाद तरीके से होता आ रहा है। कभी भी किसी को श्रद्धांजलि देने से नहीं रोका गया, लेकिन इस बार प्रशासन का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
समिति ने इसे आयोजन समिति के अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि यह सिरिंगसिया के ग्रामीणों और वीर शहीदों का अपमान है। समिति ने पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले इस शहीद स्थल की गरिमा की रक्षा के लिए राज्यपाल से संरक्षण की मांग की और प्रशासनिक मनमानी पर रोक लगाने का आग्रह किया।
समिति का दावा है कि राज्यपाल संतोष गंगवार ने पूरे मामले की गंभीरता को समझते हुए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी हूल दिवस और संथाल परगना स्थापना दिवस के अवसर पर साहेबगंज में पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन के कार्यक्रमों को अनुमति नहीं मिलने पर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ चुके हैं।

