कोल्हान विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ रवि रंजन नागालैंड केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद पर योगदान दिए –
कोल्हान विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ रवि रंजन नागालैंड केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद पर योगदान दिए


– 15 जून को कोल्हान विश्वविद्यालय से विरमित होकर नागालैंड विश्वविद्यालय में दिया योगदान
सरायकेला, संवाददाता
कोल्हान विश्वविद्यालय के सुदूर सारंडा में बने डिग्री कॉलेज जगन्नाथपुर के हिन्दी विभाग में सहायक प्राध्यापक पद पर कार्यरत डॉ रवि रंजन कुमार 15 जून को कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा से विरमित होकर नागालैंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर पद पर योगदान दिए। प्रो रविरंजन अत्यंत मेधावी और विविध विषयों के ज्ञाता विद्वानों के श्रेणी में हैं।
उन्होंने भारतीय नवजागरण श्रृंखला पर कई किताबें लिखी हैं। ‘भारतीय नवजागरण और दलित’, ‘भारतीय नवजागरण और डॉ. रामविलास शर्मा का चिन्तन’ के साथ कई महत्वपूर्ण किताबें लिखकर उन्होंने साहित्य और अन्य ज्ञानानुसासनों में अपना योगदान दिया है। इसके अतिरिक्त वे एक प्रतिष्ठित पत्रिका ‘लोकचेतना’ का 2012 से संपादन करते रहे हैं। उनके 50 से अधिक शोध-पत्र भारत के अतिमहत्वपूर्ण शोध-जर्नलों में प्रकाशित हैं। उन्होंने अपने कोल्हान विश्वविद्यालय के कार्यकाल में से ख़ुद के निर्देशन में आधा दर्जन शोधार्थियों को शोध-कार्य सम्पन्न करवाया है। दर्जनों शोधार्थियों के वे मेन्टर की भूमिका में रहे हैं। यह कोल्हान विश्वविद्यालय के अभिलेख में है। निरन्तर लेखन करना डॉ. रविरंजन का सगल रहा है।
……..
घाटशिला कॉलेज से पढ़े उनके कई विद्यार्थी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की छात्रवृत्ति पाकर भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों में शोध-कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर डॉ रविरंजन सर घटशीला कॉलेज नहीं आये होते तो हमलोग यूजीसी की इस परीक्षा का नाम तक नहीं जानते। डॉ. रविरंजन कोल्हान विश्वविद्यालय के जहाँ और जिस जिस कॉलेज में रहे वे विद्यार्थियों के बीच ख़ासे लोकप्रिय रहे।

